देव आनंद की 102वीं जयंती: शिमला में कहानी और गीतों संग फिर जगा उनका जादू

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Dev Anand's 102nd birth anniversary: ​​His magic rekindled with stories and songs in Shimla
देव आनंद की 102वीं जयंती: शिमला में कहानी और गीतों संग फिर जगा उनका जादू

शिमला: देव आनंद की 102वीं जयंती पर शिमला का ऐतिहासिक गेयटी थिएटर रंगीन यादों से भर उठा। थ्री आर्ट्स क्लब और कात्यायनी की ओर से आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक संध्या में कहानी, नाटकीयता और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला जिसने दर्शकों को महान अभिनेता की सुनहरी सिनेमाई यात्रा की याद दिला दी।

देव आनंद को समर्पित रंगारंग कार्यक्रम

शुक्रवार शाम को हुए इस आयोजन की शुरुआत दिग्गज अभिनेता देव आनंद के जन्मदिन पर केक काटकर हुई। इसके बाद रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और थ्री आर्ट्स क्लब के वरिष्ठ सदस्य श्रीनिवास जोशी तथा कीकली ट्रस्ट की वंदना भागरा को सम्मानित किया गया।

Dev Anand ki Yaaden 2

प्रस्तुति का मुख्य आकर्षण रही देव आनंद की भांजी सोहेला कपूर द्वारा लिखित और निर्देशित स्क्रिप्ट, जिसे अभिनेता निधिकान्त पाण्डेय ने हिन्दी में नाट्य रूपांतरित किया। उन्होंने सवाल-जवाब की शैली और नाटकीय अंदाज़ से देव आनंद के जीवन, उनकी सोच और उनके फिल्मी सफ़र के कई रोचक पहलुओं को सामने रखा।

संगीत की धुनों पर झूमे दर्शक

कार्यक्रम में स्थानीय गायक देवानंद झा ने देव आनंद के सदाबहार गीतों को गाकर समारोह को और भी खास बना दिया। कभी दर्शक उनके साथ गुनगुनाते तो कभी थिरकते हुए अपने पसंदीदा गानों की यादों में खो जाते।

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देव आनंद के अंदाज़ में पहुंचे दर्शक

दिल्ली और अन्य शहरों से भी कई लोग इस आयोजन का हिस्सा बनने शिमला आए थे। खास बात यह रही कि कुछ दर्शक देव आनंद की ही तरह कपड़े पहनकर और उन्हीं के अंदाज़ में बोल-चाल करते हुए पहुंचे। यह नजारा इस बात का प्रमाण था कि उनका जादू आज भी उतना ही तरोताज़ा है जितना उनके ज़माने में था।

आगे भी होंगे मंचन

समूचे कार्यक्रम के दौरान ऐसा भावपूर्ण वातावरण बना कि दर्शक पूरी तरह से उसमें डूबे रहे। बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट ने कलाकारों का मनोबल बढ़ाया।

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इस आयोजन की निर्माता अनुराधा दर ने बताया कि थ्री आर्ट्स क्लब, जिसकी शुरुआत 1943 में शिमला से हुई थी, अब देव आनंद की 102वीं जयंती को यादगार बनाते हुए इस नई प्रस्तुति को पूरे देश के कई हिस्सों में ले जाने की योजना बना रहा है।

कार्यक्रम के समापन पर जब कलाकारों ने मंच से आभार व्यक्त किया तो गेयटी थिएटर तालियों से गूंज उठा और दर्शक देव आनंद के लोकप्रिय गीतों को गुनगुनाने लगे।