नई दिल्ली: देश के 21 प्रमुख डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स, जिनमें मुकेश अंबानी की Network18 और गौतम अडानी की NDTV जैसी मीडिया कंपनियां शामिल हैं, ने केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून की कुछ धाराओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ये प्रावधान पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारों के सूत्रों की गोपनीयता के लिए खतरा पैदा करते हैं।
किन धाराओं को चुनौती
DNPA ने 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें DPDP Act की धारा 7, 17(2), 18, 19, 27, 29, 36, 37 और 44(3) के साथ ही DPDP Rules के नियम 16, 17 और 23 को रद्द करने की मांग की गई है। पब्लिशर्स का तर्क है कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करते हैं।
पत्रकारिता पर क्या खतरा?
याचिका में कहा गया है कि DPDP कानून के तहत सहमति, डेटा मिटाने और व्यक्तिगत जानकारी संबंधी प्रावधान खोजी पत्रकारिता को प्रभावित कर सकते हैं। पब्लिशर्स का कहना है कि सरकारी एजेंसियां इन प्रावधानों के जरिए पत्रकारों से सूत्रों और दस्तावेजों की जानकारी मांग सकती हैं, जिससे स्रोतों की गोपनीयता टूट सकती है।
DNPA का आरोप है कि इससे मीडिया हाउसों को कुछ तथ्यात्मक खबरें हटाने या उनमें बदलाव करने का दबाव बन सकता है, जिससे प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
अडानी-अंबानी की कंपनियां भी शामिल
यह याचिका केवल अडानी या अंबानी के मीडिया ग्रुप की नहीं है। DNPA के 21 सदस्यों में Network18, NDTV, The Indian Express और Times Internet जैसे प्रमुख मीडिया समूह शामिल हैं। यानी यह डिजिटल न्यूज इंडस्ट्री की सामूहिक कानूनी लड़ाई है, जिसमें अडानी और अंबानी की कंपनियां प्रमुख सदस्य हैं।
अगली सुनवाई आज
मामले की सुनवाई मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में होने की सूचना है। विवादित प्रावधानों का प्रभाव मई 2027 से लागू होने की बात कही जा रही है, जबकि पब्लिशर्स चाहते हैं कि अदालत इन्हें अभी रद्द कर दे।
अभी यह केवल पब्लिशर्स की याचिका और उनके तर्क हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
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