RSS के 100वें स्थापना दिवस पर डॉ. इक़बाल सक्का ने बनाई विश्व की सबसे छोटी स्वर्ण कलाकृतियां

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Dr. Iqbal Sakka created the world's smallest gold artefacts on the 100th foundation day of RSS.
RSS के 100वें स्थापना दिवस पर डॉ. इक़बाल सक्का ने बनाई विश्व की सबसे छोटी स्वर्ण कलाकृतियां

उदयपुर: राजस्थान के प्रसिद्ध स्वर्ण शिल्पी और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. इक़बाल सक्का ने एक बार फिर अपनी अनूठी कला से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोने से बनी दुनिया की सबसे छोटी पांच कलाकृतियां तैयार की हैं। इन कलाकृतियों में ओम, केसरिया झंडा, काली टोपी, दंडा और दीपक शामिल हैं।

मात्र एक मिलीमीटर का आकार

डॉ. सक्का ने मीडिया को बताया कि इन कलाकृतियों का आकार मात्र एक मिलीमीटर है, जिन्हें माइक्रो लेंस की मदद से ही देखा जा सकता है। इन्हें तैयार करने में उन्हें लगभग पांच दिन का समय लगा। उन्होंने कहा कि ये पांचों प्रतीक संघ की परंपरा और मूल विचारधारा को दर्शाते हैं:-

  • ओम – आध्यात्म और शांति का प्रतीक
  • केसरिया झंडा – साहस और त्याग का प्रतीक
  • काली टोपी और दंडा – अनुशासन और निष्ठा का प्रतीक
  • दीपक – ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक, जो देश को नई दिशा देता है

संघ प्रमुख को करेंगे विशेष भेंट

डॉ. सक्का ने बताया कि वे इन सूक्ष्म स्वर्ण कलाकृतियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को विशेष रूप से भेंट करेंगे। इसके लिए उन्होंने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार को पत्र लिखा है। उन्होंने अनुरोध किया है कि ये अद्वितीय स्वर्ण कलाकृतियां उदयपुर की ओर से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक बनकर संघ प्रमुख को भेंट की जाएं।

121 से अधिक विश्व रिकॉर्ड

डॉ. सक्का की पहचान दुनिया के सबसे सूक्ष्म स्वर्ण शिल्पकार के रूप में है। उनके नाम अब तक 121 से अधिक वर्ल्ड रिकॉर्ड्स दर्ज हैं। उन्होंने इससे पहले गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में कई बार अपना नाम दर्ज कराया है। उनका हर नया काम कला के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करता है।

कला के माध्यम से एकता का संदेश

डॉ. सक्का ने कहा कि उन्होंने यह कार्य केवल कलात्मकता के लिए नहीं, बल्कि देश की एकता, सौहार्द और भाईचारे का सशक्त संदेश देने के लिए किया है। “मैं चाहता हूं कि मेरी यह भेंट देशभर में आपसी प्रेम और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बने,” उन्होंने कहा।