Haryana Lynching: लैब रिपोर्ट में गौमांस की पुष्टि नहीं, क्या ज़िंदा हो पायेगा मुस्लिम युवक?

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अगस्त में हरियाणा के बाधरा कस्बे में गौरक्षकों ने एक मुस्लिम व्यक्ति को मवेशियों को ले जाने के संदेह में पीट-पीटकर मार डाला था। मामले में हाल ही में हुई घटनाओं से महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। हंसावास खुर्द गांव की झुग्गियों से लिए गए मांस के नमूनों के संबंध में फरीदाबाद प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि गाय के मांस का कोई सबूत मौजूद नहीं था।

डीएसपी भारत भूषण ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, “पुलिस जल्द ही सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी।” घटना 27 अगस्त को हुई थी, जब गौरक्षकों ने प्रतिबंधित पशु का मांस पकाने के संदेह में पश्चिम बंगाल के एक युवक साबिर मलिक की हत्या कर दी थी। उसका शव हंसवास खुर्द के पास से बरामद किया गया था। घटना को लेकर हुए हंगामे के बाद पुलिस ने हत्या के आरोपी दस गौरक्षकों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि छह अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं।

हत्या के बाद पुलिस ने आस-पास की झुग्गियों में जहां प्रवासी मजदूर रहते थे, वहां के बर्तनों से मांस के नमूने एकत्र किए। तत्कालीन एसएचओ जयबीर की निगरानी में इन नमूनों को जांच के लिए फरीदाबाद लैब भेजा गया, जहां से अब यह पुष्टि हो गई है कि बर्तनों में मिला मांस संरक्षित पशु का नहीं था।

डीएसपी भारत भूषण ने कहा, “हम साबिर मलिक की हत्या के मामले में 10 संदिग्धों को पहले ही गिरफ्तार कर चुके हैं और छह और लोगों को हिरासत में लिया जाना बाकी है। फरीदाबाद से आई लैब रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि मांस गोमांस नहीं था और हम जल्द ही मामले को अदालत में पेश करेंगे।” जेएनयू छात्र संघ के सदस्यों और कम्युनिस्ट प्रतिनिधिमंडल ने घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए 15 सितंबर को बधरा और आसपास के गांव हंसावास खुर्द का तीन घंटे का दौरा किया। अपने निरीक्षण के बाद, जेएनयू टीम ने हत्या के मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।

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