जामिया में छात्र आंदोलन 14वें दिन तेज: यूनियन बहाली की मांग, कैंपस में तनाव के बाद क्लास ऑनलाइन

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नई दिल्ली: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ बहाली की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन रविवार को 14वें दिन पहुंच गया। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के समर्थन में कैंपस में सैकड़ों छात्र धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रशासन ने तनाव के बाद सभी कक्षाएं ऑनलाइन करने और लाइब्रेरी बंद रखने का फैसला किया है।

छात्रों की तीन मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारी छात्रों ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) की बहाली और चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने मुख्य प्रॉक्टर को हटाने और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी उठाई है।

बता दें कि जामिया में 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों का कहना है कि यूनियन न होने से हॉस्टल, मेडिकल सुविधा और कैंपस से जुड़ी समस्याओं को उठाने का प्रभावी मंच नहीं मिल पा रहा है।

12 अक्टूबर से भूख हड़ताल

आंदोलन की शुरुआत 12 अक्टूबर को हुई थी, जब छात्रों ने गेट नंबर 18 पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरुआत में पांच छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, जबकि रविवार को चार छात्रों की हड़ताल जारी बताई जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों के खिलाफ निलंबन और रस्टिकेशन जैसी कार्रवाई के आरोप भी लगे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन आंदोलनकारियों को दबाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से इस संबंध में तत्काल स्पष्ट प्रतिक्रिया खबर में नहीं मिली।

24 अक्टूबर को झड़प, फिर बदले नियम

24 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल पर छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हो गया। छात्रों का आरोप है कि प्रशासनिक स्टाफ ने उनके प्रदर्शन टेंट हटाने की कोशिश की, जिसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी ने तत्काल प्रभाव से सभी कोर्स की कक्षाएं ऑनलाइन कर दीं। डॉ. जाकिर हुसैन लाइब्रेरी और पुरानी लाइब्रेरी को भी अगले आदेश तक बंद रखा गया है। यूनिवर्सिटी ने छात्रों से ऑनलाइन क्लास शेड्यूल का पालन करने और कैंपस न आने को कहा है।

प्रशासन ने बनाई संविधान समिति

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 21 अक्टूबर को छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित की थी। लेकिन छात्रों का कहना है कि केवल समिति बनाना काफी नहीं है; उन्हें चुनाव की स्पष्ट समयसीमा चाहिए।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ID कार्ड होने के बावजूद हॉस्टल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा और मेडिकल इमरजेंसी में हेल्थ केयर सेंटर तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। ये आरोप अभी छात्रों के दावे हैं; इनकी पुष्टि के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी है।

कैंपस में बढ़ा तनाव

कैंपस की दीवारों पर विवादित नारे लिखे जाने का मामला भी सामने आया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इन नारों से अपना कोई संबंध होने से इनकार किया है। इस बीच कैंपस के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

आंदोलन अब जामिया में 2019 के बाद का सबसे बड़ा छात्र विरोध बताया जा रहा है। अगले दिनों यह तय होगा कि प्रशासन छात्र संघ चुनाव की समयसीमा घोषित करता है या नहीं, क्योंकि छात्र अपनी तीनों मांगों पर अड़े हुए हैं।

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