मुरादाबाद: राजस्व न्यायालयों को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए मण्डलीय कार्यशाला आयोजित, कमिश्नर ने दिए कड़े निर्देश

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मुरादाबाद: राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से कमिश्नर कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय मण्डलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुरादाबाद मण्डल के मण्डलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यशाला में मुरादाबाद मण्डल के विभिन्न जनपदों के राजस्व अधिकारियों, शासकीय अधिवक्ताओं और राजस्व कर्मियों ने भौतिक व ऑनलाइन (जूम) माध्यम से प्रतिभाग किया।

समयबद्ध और त्रुटिरहित न्याय पर मण्डलायुक्त का जोर

मण्डलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्व न्यायालयों में पारित होने वाला प्रत्येक आदेश न्यायसंगत, विधिसम्मत और गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ राजस्व कानूनों और प्रक्रियाओं में निरंतर बदलाव आ रहे हैं, इसलिए अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।

“अनावश्यक तकनीकी आधारों पर वादों को खारिज करने से बचें। न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के अनुरूप कार्य करते हुए जनता को त्वरित और निष्पक्ष न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”— आञ्जनेय कुमार सिंह, मण्डलायुक्त

केवल तकनीकी कारणों से खारिज नहीं होंगे वाद

मण्डलायुक्त ने विशेष निर्देश दिए कि धारा-5 (मियाद अधिनियम) के तहत वादों को केवल तकनीकी कमियों के चलते निरस्त न किया जाए। प्रभावित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देकर मामले का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए।

पीठासीन अधिकारियों को दिए गए मुख्य निर्देश:

दैनिक परीक्षण: अवर न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी विचाराधीन पत्रावलियों के फर्द-ए-कार्रवाई का प्रतिदिन परीक्षण करें।

अभिलेखों का रख-रखाव: न्यायालय के दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक अवलोकन करें, त्रुटिपूर्ण पेजिंग और कमियों को तुरंत दूर कराएं।

स्वयं लिखें आदेश: पीठासीन अधिकारी यथासंभव अपने न्यायिक आदेश स्वयं लिखें।

प्रभावी समन प्रक्रिया: समन तामील प्रक्रिया को प्रभावी बनाएं और सभी पक्षकारों को विधिवत नोटिस जारी करें।

विशेषज्ञों ने दी शत्रु संपत्ति और सीलिंग एक्ट की विस्तृत जानकारी

कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी व राजस्व विशेषज्ञ श्री जे.पी. गुप्ता और शत्रु सम्पत्ति के मुख्य पर्यवेक्षक श्री यशपाल सिंह ने अधिकारियों को महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों पर प्रशिक्षण दिया।

विशेषज्ञों ने नॉन-ज़ेड.ए. भूमि, नजूल भूमि, शत्रु सम्पत्ति, निष्क्रांत सम्पत्ति, सीलिंग अधिनियम, वक्फ अधिनियम और शत्रु सम्पत्ति अधिनियम-1968 पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश में सर्वाधिक शत्रु सम्पत्तियाँ उत्तर प्रदेश में हैं, जिनके संरक्षण और उन्हें अतिक्रमणमुक्त कराने में राजस्व अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

व्यावहारिक कमियों और विधिक प्रावधानों पर मंथन

  • अपर आयुक्त (प्रथम) अरुण कुमार सिंह ने निष्क्रांत सम्पत्ति, सीलिंग और वक्फ अधिनियम से जुड़े विधिक पहलुओं की जानकारी दी।
  • मण्डलीय शासकीय अधिवक्ता श्री दिनेश चौहान ने न्यायालयों में वादों के निस्तारण के दौरान आने वाली व्यावहारिक और कानूनी कमियों को रेखांकित करते हुए उनके समाधान के उपाय सुझाए।

प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ समापन

कार्यशाला के अंतिम सत्र में एक ओपन प्रश्नोत्तर कार्यक्रम (Q&A Session) आयोजित किया गया। इसमें उपस्थित उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और कानूनी उलझनों को विशेषज्ञों के सामने रखा, जिनका मौके पर ही विस्तार से समाधान किया गया।

कार्यशाला में ये रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में अपर आयुक्त (प्रथम) अरुण कुमार सिंह, उप आयुक्त गजेन्द्र प्रताप सिंह सहित बिजनौर, रामपुर और मण्डल के अन्य जनपदों के समस्त अपर जिलाधिकारी (ADM), उपजिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार, नायब तहसीलदार, मण्डलीय व जिला शासकीय अधिवक्ता तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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