रामपुर: बायोमैट्रिक समानता की अड़चन दूर, जुड़वा बहनों को मिली अलग-अलग आधार पहचान

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रामपुर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों—तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर—के फिंगरप्रिंट और आंखों की रेटिना स्कैन में अत्यधिक बायोमैट्रिक समानता पाए जाने के कारण उनका आधार पंजीकरण तकनीकी दिक्कतों में फंसा हुआ था।

समस्या का मूल: जब बायोमैट्रिक डेटा हो जाए ‘आइडेंटिकल’

यूआईडीएआई (UIDAI) के सिस्टम में हर व्यक्ति के बायोमैट्रिक डेटा—फिंगरप्रिंट, आइरिस/रेटिना और फोटो—के आधार पर यूनिक पहचान सुनिश्चित की जाती है। लेकिन दुर्लभ मामलों में, जैसे कि कुछ जुड़वा बच्चों में, बायोमैट्रिक पैटर्न इतने समान हो सकते हैं कि सिस्टम उन्हें अलग-अलग व्यक्ति के रूप में पहचानने में कठिनाई महसूस करे।

तुबा और खिजरा के साथ भी यही हुआ: उनके फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन में इतनी ज्यादा समानता थी कि आधार पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी बाधा आ रही थी और दोनों को अलग-अलग आधार नंबर जारी नहीं हो पा रहा था।

जनता दर्शन में शिकायत, डीएम ने की त्वरित कार्रवाई

लगभग तीन माह पहले रामपुर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में पिता जुबैर इलियास ने अपनी बेटियों की इस अनोखी समस्या को जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के सामने रखा। जनता दर्शन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए रोजाना सुबह 10 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित किया जाता है।

शिकायत मिलते ही डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली स्थित यूआईडीएआई मुख्यालय से संपर्क साधा और मामले को प्राथमिकता पर हल करने का अनुरोध किया।

तीन महीने की कोशिश के बाद मिला समाधान

डीएम की पहल और यूआईडीएआई के तकनीकी सहयोग के बाद लगभग तीन महीने की प्रक्रिया के पश्चात दोनों जुड़वा बहनों को अलग-अलग आधार पहचान पत्र जारी कर दिया गया। इस दुर्लभ बायोमैट्रिक चुनौती को हल करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे दोनों बच्चों की पहचान अब सिस्टम में अलग-अलग रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित है।

सरकारी संवेदनशीलता की मिसाल

इस मामले को योगी सरकार की संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जहां एक आम नागरिक की तकनीकी समस्या को उच्च स्तर तक पहुंचाकर हल किया गया। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जनता दर्शन के माध्यम से ऐसे जटिल मामलों का भी तेजी से निस्तारण संभव हो पा रहा है।

अब तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर दोनों के पास अपने-अपने वैध आधार कार्ड हैं, जो भविष्य में उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में सहायक होंगे।

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