रामपुर (उत्तर प्रदेश):जनपद रामपुर की स्वार-टांडा विधानसभा सीट (34) से विधायक श्री शफीक अहमद अंसारी की एक कथित टिप्पणी को लेकर वाल्मीकि समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है। विधायक द्वारा मीडिया इंटरव्यू के दौरान वाल्मीकि समाज की जातिगत पहचान पर टिप्पणी किए जाने के विरोध में वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अपनाया है और मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग से की है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वार-टांडा से निर्वाचित विधायक शफीक अहमद अंसारी ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में नगर पंचायत नरपतनगर दूँदावाला के चेयरमैन खालिद अली से जुड़े एक राजनीतिक संदर्भ में कथित तौर पर अमर्यादित टिप्पणी की थी।
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि विधायक की इस भाषा से समाज की सामाजिक प्रतिष्ठा, स्वाभिमान और गरिमा को गहरी ठेस पहुँची है। समाज का मानना है कि किसी व्यक्ति या प्रतिद्वंद्वी को राजनीतिक चुनौती देने या नीचा दिखाने के लिए वाल्मीकि समाज की पहचान का इस तरह प्रयोग करना अत्यंत आपत्तिजनक, असंवैधानिक और सामाजिक समरसता के प्रतिकूल है।
भावाधस और वाल्मीकि समाज का जोरदार प्रदर्शन
इस मामले को लेकर नगर पंचायत नरपतनगर में वाल्मीकि समाज की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए भावाधस (भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज) के प्रदेश उपाध्यक्ष विक्की राज एडवोकेट ने कहा कि विधायक का बयान समाज के प्रति उनकी मानसिकता को दर्शाता है।
बैठक के बाद विक्की राज एडवोकेट के नेतृत्व में वाल्मीकि समाज के लोगों ने विधायक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
मुख्य मांगें और आगे की चेतावनी
आयोग को भेजी गई शिकायत और स्थानीय स्तर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान समाज ने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
- निष्पक्ष जांच और स्पष्टीकरण: उत्तर प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग से मीडिया इंटरव्यू की मूल वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराने और विधायक से लिखित जवाब मांगने की मांग की गई है।
- सार्वजनिक माफी: वाल्मीकि समाज की भावनाओं को देखते हुए विधायक से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है।
- कानूनी कार्रवाई: यदि प्रकरण में दंडनीय अपराध के तत्व पाए जाते हैं, तो सक्षम अधिकारियों द्वारा विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
- सामाजिक बहिष्कार: वाल्मीकि समाज ने निर्णय लिया है कि जब तक विधायक माफी नहीं मांगते, तब तक समाज का कोई भी व्यक्ति उन्हें अपने किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करेगा और उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
