अफ्रीका में 2024 में एमपॉक्स के 14,700 मामले आए सामने: डब्ल्यूएचओ

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कंपाला, 12 जनवरी: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि जनवरी 2024 से 5 जनवरी 2025 तक 20 अफ्रीकी देशों में एमपॉक्स के 66 मौतों सहित लगभग 14,700 मामले सामने आए।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शनिवार को कहा कि पुष्टि किए गए मामले केवल संदिग्ध हैं।

इससे पहले डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) जैसे देशों में संदिग्ध एमपॉक्स मामलों की एक महत्वपूर्ण संख्या सामने नहीं आ पाती, जिससे इस मामले की पुष्टि नहीं हो पाती।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और पड़ोसी देशों में फैल रहे वायरस के कई वेरिएंट बीमारी का कारण बन रहे हैं। इन मामलों में से अधिकांश मामले अफ्रीका से यात्रा कर रहे लोगों के थे।

डब्ल्यूएचओ ने बताया कि ये मामले मुख्य रूप से उन वयस्कों में थे जिन्होंने अपने शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर यात्रा जारी रखी। स्वास्थ्य अधिकारियों को निगरानी रखने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

डब्ल्यूएचओ की पिछली रिपोर्ट के अनुसार इस वायरस का नया वेरिएंट सितंबर 2023 के मध्य में सामने आने का अनुमान लगाया जा रहा है। यात्रा से संबंधित एमपॉक्स मामले विभिन्न देशों में अलग-अलग चुनौतियां पैदा करते हैं।

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि सीमित संसाधनों और डायग्नोस्टिक परीक्षण तक सीमित पहुंच के परिणामस्वरूप इसका पता लगाने में देरी हो सकती है। अगस्त 2024 के मध्य में अफ़्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने अफ्रीका में चल रहे एमपॉक्स के प्रकोप को पब्लिक हेल्‍थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था। कुछ ही समय बाद डब्ल्यूएचओ ने एमपॉक्स को अंतरराष्ट्रीय हेल्‍थ इमरजेंसी घोषित कर दिया, जिससे दो साल में दूसरी बार इस बीमारी के लिए वैश्विक चेतावनी सक्रिय हो गई।

एमपॉक्स को मंकीपॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। पहली बार 1958 में इसे प्रयोगशाला के बंदरों में पहचाना गया था। यह एक दुर्लभ वायरल बीमारी है जो आम तौर पर शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और दूषित सामग्रियों से फैलती है।

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