तुझे किताब से मुमकिन नहीं फ़राग़… क्या हम वाकई ‘साहिब-ए-किताब’ हैं? – यावर रहमान

Date:

क़ुरान एक ऐसी अज़ीम किताब है जो इस कायनात को किसी इत्तेफ़ाक या ‘घमंड की रचना’ के बजाय एक मुनज़़म (संगठित) ईश्वरीय मंसूबे के तौर पर पेश करती है। यह ग्रंथ न सिर्फ सभ्यता का प्रणेता है, बल्कि आला दर्जे की तहजीब का शिल्पी भी है। यह किताब अल्लाह की ओर से ‘अब्द-अल्लाह’ के मार्गदर्शन के लिए उतारी गई है, जिसके बिना इंसान भी अधूरा है और यह कायनात भी।

कायनाती हक़ीक़त और हमारा अलमिया

दुनिया के तमाम वैज्ञानिक आविष्कारों और खोजों का असल मंबा (स्रोत) भी यही ग्रंथ है, जिसके रहनुमाई में इंसानी सभ्यता आज सितारों पर कमंद डाल रही है। यह वह किताब है जो दिल और निगाह को संकीर्णता और गुलामी से नजात दिलाती है; जो इल्म-ओ-दानिश का आदि और अंत है।

लेकिन अफ़सोस! इल्म और शऊर के इस मरकज़ (केंद्र) को “त्याग” कर आज पूरी दुनिया में मुसलमान “अज्ञात” और गुमनाम होते जा रहे हैं। हम यह जानते हुए भी इसका हक अदा नहीं कर पा रहे कि यह किताब, जो ‘बशारत’ (खुशखबरी) भी देती है और ‘अज़ाब’ (चेतावनी) भी, उस ‘हेवनली सेमिनरी’ का सबसे फितरी निसाब (पाठ्यक्रम) है, जो खुदा की धरती पर अमन, अद्ल (न्याय) और खैर की स्थापना के लिए है।

एक मुकम्मल जाब्ता-ए-हयात (Complete Code of Life)

हम अच्छी तरह वाकिफ हैं कि यह किताब जमीन पर अल्लाह के आखिरी रसूल की पुकार और उनके जरिए एक ‘खैर-ए-उम्मत’ के निर्माण का जीता-जागता रिकॉर्ड है। हम समझते हैं कि यह किताब कायनात की हकीकत, इसके आगाज़-ओ-अंजाम और इसके दस्तूर पर एक मुदल्लल (तर्कपूर्ण) सबक है। यह इंसानी अकीदे, अखलाक, मुआशरत, मआशियत (अर्थव्यवस्था), सियासत और कानून से मुताल्लिक ‘मुकम्मल जाब्ता-ए-हयात’ है।

रूहानी अमराज़ का इलाज और तजुर्बा

यह किताब इंसान के तमाम रूहानी अमराज़ (रोगों) का मुदावा है। लेकिन आज की उम्मत इस जाति तजुर्बे (Personal Experience) से महरूम है कि यह किताब हसद, किब्र (गर्व), रियाकारी (दिखावा), हिर्स (लोभ), खौफ और मायूसी जैसी दिल की तमाम कमजोरियों को जड़ से उखाड़ फेंकती है और इंसान को एक मजबूत किरदार अता करती है।

सिद्धांत की मजबूती के लिए तजुर्बा लाज़मी था, मगर हममें से कितने खुश-नसीब हैं जिन्हें यह तजुर्बा हुआ कि यह किताब:

  • निगाहों को बेबाकी और दिल को गुदाज़ (तड़प) देती है।
  • गुफ़्तगू में गरमाहट और तख़य्युल (सोच) को उड़ान अता करती है।
  • इंसान को रंज-ओ-राहत, हर हाल में साबिर (धैर्यवान), शाकिर (आभारी) और आली-ज़रफ (उदार) होना सिखाती है।

क्या हम सिर्फ ‘किताब-ख्वाँ’ बनकर रह गए?

हम में से कितने लोग इस बेदारी के साथ इसे पढ़ते हैं कि यह ‘हबलुल्लाह’ (अल्लाह की मजबूत रस्सी) है? क्या हमारा यह यकीन है कि इस रस्सी का एक सिरा हमारे रब के हाथ में है? इस अफरा-तफरी के आलम में क्या हम इसे इस डर से थामते हैं कि कहीं यह हाथ से छूट न जाए और हम जिल्लत के दलदल में गरक न हो जाएं?

हक के सच्चे मुसाफिर के लिए यह एक ‘खुली किताब’ है, जिसके हर्फ-ओ-मायनी पारदर्शी मोतियों की तरह गले का हार बन जाते हैं। यह वह ‘आब-ए-हयात’ है जिसके बिना हर रूह प्यासी, दिल की सरजमीं बंजर और हर ज़हन एक तारीक (अंधेरे) कमरे की मानिंद है।

इल्म का जखीरा या हिदायत का नूर?

Yawer rehman
यावर रेहमान , लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार

यह किताब महज फलसफे का मजमुआ या मंतिक (तर्क) की बहस नहीं है, और न ही यह अलमारियों की धूल चाटने के लिए है। यह ‘खुद-आगाही’ (Self-realization) की वह डायरेक्टरी है जिसमें पाठक के वजूद का पूरा नुस्खा मौजूद है। बिना इस किताब के बराहे-रास्त (Direct) ताल्लुक के, खालिक और मखलूक के दरमियान वह निस्बत पैदा नहीं हो सकती जो सहाबा-ए-किराम में हुई थी।

कुरान के चाहने वालों का तजुर्बा कहता है कि यह किताब इंसान को एक ‘सच्चे सजदे’ की लज्जत से आशना कराकर दुनिया के तमाम झूठे सजदों से आजाद कर देती है। यह अपने पढ़ने वाले को निफाक (पाखंड) की गंदगी से पाक कर उसे शरीफ-उल-नफ्स और साहिब-ए-किरदार बनाती है।

आज कुरान के साथ हमारा ताल्लुक महज लफ्जी दावों तक महदूद है। बड़े-बड़े दानिशवर खुद भी इससे बे-ताल्लुक हैं और आवाम को भी यह कहकर डरा देते हैं कि इसे समझना मुमकिन नहीं। मुझे समझ नहीं आता कि लोग इस ‘वही-ए-इलाही’ के बारे में ऐसी जुर्रत कैसे कर सकते हैं, जो प्यासे दिलों पर रहमत बनकर बरसती है।

अल्लामा इकबाल ने क्या खूब कहा था:

तुझे किताब से मुमकिन नहीं फ़राग़ कि तू, किताब-ख़्वाँ है मगर साहिब-ए-किताब नहीं।

(अर्थ: तू किताब पढ़ने में तो मशगूल है, पर अफसोस कि तू साहिब-ए-किताब नहीं बन सका; यानी किताब तेरे अंदर नहीं उतरी।)

Share post:

Visual Stories

Popular

More like this
Related

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से होगा ‘आतंकिस्तान’ का अंत: पहलगाम हमले की बरसी पर गरजे इंद्रेश कुमार

न भूलेंगे, न छोड़ेंगे: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देशभर...

Operation Sindoor to Continue Until ‘Terroristan’ is Eliminated: Indresh Kumar

Muslim Rashtriya Manch Marks Pahalgam Attack Anniversary with Nationwide...

जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्कूल का कक्षा 10वीं बोर्ड रिजल्ट घोषित, छात्राएं फिर आगे रहीं

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2026: जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्कूल...

Jamia Millia Islamia Declares Class X Results: Girls Outshine Boys with 98.65% Pass Rate

New Delhi, April 22, 2026: Jamia Millia Islamia (JMI)...