आज़म खान के बयान ने मचाई सियासी हलचल, बिहार चुनाव पर कहा- ‘इनकार नहीं किया जा सकता’

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर दिया गया अपना बयान सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। रामपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे बिहार चुनाव प्रचार में जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “इनकार भी नहीं किया जा सकता, जहां ज्यादा जरूरत होगी वहां जा भी सकता हूं।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब समाजवादी पार्टी ने उन्हें बिहार चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है।​

अन्याय के जिक्र पर भावुक हुए आज़म खान

करीब दो साल जेल में बिताने के बाद रिहा हुए आज़म खान ने अपने ऊपर हुए अन्याय का जिक्र करते हुए कहा कि हिसार विश्वविद्यालय के एक वाइस चांसलर का पत्र वायरल हुआ है जिसमें उन्होंने वकील कपिल सिब्बल को लिखा है कि जब उन्होंने आज़म खान का इंटरव्यू सुना तो आंखों से आंसुओं की धारा नहीं रुकी। आज़म खान ने कहा, “जब देश के पढ़े-लिखे लोगों ने यह समझ लिया है कि ऐसा अन्याय किसी शहर, किसी इलाके, किसी परिवार, किसी व्यक्ति के साथ कभी नहीं हुआ। इतने फर्जी और झूठे मुकदमे और इतनी बड़ी-बड़ी सजाएं लोगों का दिल रो दिया है।”​

लोकतंत्र और न्याय की बात

बिहार चुनाव के संदर्भ में आज़म खान ने कहा कि बिहार ने हमेशा देश को नई राह दी है और लोकतंत्र की रक्षा की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार से देश में दहशत का माहौल खत्म होगा या कम होगा। उन्होंने कहा, “नाइंसाफी का दौर कम होगा या खत्म होगा। बेगुनाहों के साथ बर्बरता नहीं होगी, अमानवीयता नहीं होगी।” आज़म खान ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में बदले की भावना नहीं होनी चाहिए और जो हुआ वह गलत है, अगर कभी ऐसा हुआ तो वह भी गलत होगा।​

मुस्लिम मुख्यमंत्री प्रत्याशी पर सवाल

जब आज़म खान से पूछा गया कि बिहार में 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी होने के बावजूद किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया, तो उन्होंने कहा, “चाहत तो किसी की भी हो सकती है। वह जिसका कुछ ना हो, कोई परसेंटेज ना हो, उसकी भी चाहत हो सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत की राजनीति का दिल कभी बहुत छोटा है और कभी बहुत बड़ा है, इतना बड़ा है कि इसी देश में एक ऐसे साहब प्रधानमंत्री बने जो कभी ग्राम प्रधान भी नहीं हुए।​

1947 के फैसले पर सवाल

भावुक होते हुए आज़म खान ने कहा कि उन्हें अपने आप से घृणा होती है कि क्या इसी दिन के लिए उनके पूर्वज 1947 में रुके थे। उन्होंने कहा, “क्या इसी अंजाम के लिए, यही सुनने और यही सहने के लिए रुके थे।” उन्होंने सिर्फ एक वोट के लिए पूरी-पूरी आबादियों, पूरे-पूरे शहरों को नेस्तोनाबूद करने और पूरे खानदानों को बर्बाद करने की बात कही।

हर धर्म-जाति से मिल रहा समर्थन

आज़म खान ने बताया कि उनके साथ जो हमदर्दी है वह किसी धर्म या जाति की वजह से नहीं है बल्कि हर धर्म, हर जाति के लोग बड़ी तादाद में आ रहे हैं और उनकी हिम्मत बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी कोई व्यक्तिगत चाहत नहीं है, उनकी चाहत सिर्फ यह है कि अन्याय ना हो और घृणा की भी एक हद होनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी ने आज़म खान को बिहार चुनाव के दूसरे चरण के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है। यह उनके लिए जेल से रिहाई के बाद पहला बड़ा राजनीतिक दायित्व होगा।

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