बदायूं: 15 दिन से लापता नाबालिग बेटी के लिए दर-दर भटक रहे माता-पिता, पुलिस पर लगा लापरवाही का गंभीर आरोप

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बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से खाकी की संवेदनहीनता और एक मजबूर परिवार की बेबसी का बड़ा मामला सामने आया है। हजरतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में एक नाबालिग बेटी को लापता हुए 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक उसे बरामद करने में नाकाम रही है। न्याय की आस खो चुके पीड़ित माता-पिता अब अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित परिवार के अनुसार, करीब 15 दिन पहले उनके ही गांव का एक दबंग युवक उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने स्थानीय हजरतपुर थाने में शिकायत की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया और काफी मिन्नतें करने व दबाव बनाने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया।

दबंगई के साए में जीने को मजबूर है परिवार

मुकदमा दर्ज होने के दो हफ्ते बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी युवक आपराधिक और दबंग प्रवृत्ति का है। बेटी के लापता होने और आरोपी पक्ष के रसूख के कारण पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और खौफ के साए में जी रहा है। स्थानीय पुलिस से कोई ठोस मदद न मिलने पर आखिरकार परिवार ने एसएसपी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई है।

उम्र को लेकर पुलिस और परिजनों के दावों में टकराव

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

  • पुलिस का दावा: स्थानीय पुलिस का कहना है कि लड़का और लड़की दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से गए हैं।
  • परिजनों का दावा: वहीं, पीड़ित परिवार ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों ने बेटी के शैक्षणिक दस्तावेज (स्कूल सर्टिफिकेट) पेश करते हुए साबित किया है कि लड़की कानूनी रूप से नाबालिग है।

परिजनों का सीधा आरोप है कि पुलिस मामले को भटकाने और आरोपी को ढाल देने के लिए इस तरह के तर्क दे रही है।

“सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, कार्रवाई नहीं”

पीड़ित माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि जब भी वे थाने जाते हैं, उन्हें ‘जल्द कार्रवाई’ का आश्वासन देकर टाल दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी बेटी को जल्द बरामद नहीं किया गया, तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।

अब देखना यह होगा कि जिले के आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद क्या बदायूं पुलिस इस मामले में तेजी दिखाती है या फिर इस बेबस परिवार का इंतजार और लंबा होता जाएगा।

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