रामपुर — जब जिलाधिकारी (DM) अजय कुमार द्विवेदी ने इस जिले की कमान संभाली, तो आम धारणा यही थी कि एक और नौकरशाह आए हैं—वही दफ़्तर की बैठकें, योजनाओं की फाइलों पर हस्ताक्षर और रुटीन रिपोर्टें। लेकिन बेहद कम समय में उन्होंने अपनी अभिनव पहलों और ठोस परिणामों के जरिये जिले के जनजीवन को जिस सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, वह साबित करता है कि वे केवल प्रशासनिक मशीनरी चलाने नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के मजबूत इरादे से आए हैं।
हाल ही में अखबारों की सुर्खियां बनीं दो प्रमुख उपलब्धियां—‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ में प्रदेश में प्रथम स्थान और ‘मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग’ में टॉप-5 में शामिल होना—उनके कुशल नेतृत्व का स्पष्ट प्रमाण हैं।
लोकल फोकस: समस्याओं की प्राथमिकता
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने अपने कार्यकाल की शुरुआत सीधे जनता से जुड़कर और जमीनी समस्याओं की पहचान करके की। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच से लेकर कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे तक, उन्होंने प्रमुख मुद्दों की सूची बनवाई और हर समस्या के लिए जिम्मेदार विभागों को समयबद्ध लक्ष्य (टारगेट) दिए। उनकी रणनीति बेहद स्पष्ट रही: हर पहल के लिए तय मापदंड निर्धारित करना और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करना।
टीबी उन्मूलन में नंबर-वन का ऐतिहासिक सफर
सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रामपुर का टीबी उन्मूलन अभियान रहा है। 100 दिवसीय सघन टीबी खोज अभियान में रामपुर ने प्रदेश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर एक बहु-आयामी योजना लागू की:
- सघन खोज और स्क्रीनिंग: अभियान के दौरान रिकॉर्ड 32,983 लोगों के एक्स-रे किए गए और 9,133 लोगों की जांच की गई।
- त्वरित निदान और उपचार: जांच के बाद 2,429 नए टीबी मरीजों की पहचान कर उनका तत्काल उपचार शुरू कराया गया। जिले में टीबी उपचार की सफलता दर 97% तक पहुंच गई है।
- पोषण और सामाजिक सहायता: मरीजों को केवल दवाइयां ही नहीं दी गईं, बल्कि 3,102 मरीजों को पोषण सहायता किट भी उपलब्ध कराई गई।
- तकनीक का बेहतरीन उपयोग: 6 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों और 2 मेडिकल मोबाइल यूनिट्स का प्रभावी संचालन किया गया।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, यह कामयाबी अचूक नेतृत्व, सामुदायिक जुड़ाव और नियमित डेटा-आधारित मॉनिटरिंग का परिणाम है।
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग: विकास और राजस्व में लहराया परचम
केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों में भी जिले ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। शासन की मंशानुरूप योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण और विभागीय कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के चलते, रामपुर ने मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग में प्रदेश भर में टॉप-5 में अपनी जगह बनाई है। विकास व राजस्व कार्यों में जिले का यह उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रशासनिक कसावट को दर्शाता है।
कानून-व्यवस्था और आपात प्रबंधन
अपराधों की पारदर्शी रिकॉर्डिंग, रात्रि गश्त का सख्ती से पालन और पीड़ितों के लिए फास्ट-ट्रैक शिकायत निवारण सुनिश्चित कर थाना-स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है। इसके अलावा, बाढ़ व अन्य तात्कालिक आपदाओं के लिए आपदा-प्रबंधन योजनाओं को अपडेट कर नियमित मॉक ड्रिल आयोजित कराई गईं, जिससे प्रशासन की प्रतिक्रिया (response time) में काफी सुधार हुआ है।
शिक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोज़गार
- शिक्षा: स्कूलों के बुनियादी ढांचे, डिजिटल कक्षाओं और शिक्षक प्रशिक्षण पर निवेश बढ़ाया गया है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए ट्रांसपोर्ट व्यवस्था व छात्रावासों का सौंदर्यीकरण प्राथमिकता पर रहा है।
- रोज़गार व व्यापार: छोटे उद्यमियों के लिए सिंगल-विंडो (single-window) सेवा शुरू की गई ताकि लाइसेंस और अनुदान आसानी से मिल सकें। कृषि संवर्द्धन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को आधुनिक खेती और बाजार की पहुँच से जोड़ा जा रहा है।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर: स्थानीय सड़क, जलापूर्ति और बिजली योजनाओं को तेजी से पूरा कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में गति आई है।
जनसंवाद और मुखर नेतृत्व
डीएम द्विवेदी की कार्यशैली का सबसे मजबूत पहलू ‘नागरिक सहभागिता’ है। वे फील्ड विज़िट करते हैं, ऑन-साइट समस्याओं का जायजा लेते हैं और विभागों की जवाबदेही तय करते हैं। मासिक जनसुनवाई, ब्लॉक-स्तरीय पंचायत फीडबैक और सोशल मीडिया पर सक्रिय संवाद से प्रशासन और जनता के बीच भरोसे का पुल बना है।
निष्कर्ष
सीमित संसाधनों और तमाम चुनौतियों के बावजूद, रामपुर में डीएम अजय कुमार द्विवेदी का कार्यकाल प्रशासनिक बदलाव का एक प्रेरक उदाहरण है। टीबी उन्मूलन में प्रदेश में पहला स्थान और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड में टॉप-5 रैंकिंग यह दर्शाती है कि जब स्थानीय प्रशासन, संबंधित विभाग और समुदाय एक ही लक्ष्य पर केंद्रित हो जाएं, तो बड़े से बड़े संकटों को मात दी जा सकती है। रामपुर की यह बदलती तस्वीर इस बात का भरोसा दिलाती है कि सुशासन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर भी संभव है।
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