क्या एक मोबाइल की कीमत इंसान की जान से भी ज़्यादा है? बदायूं में किस्त के विवाद में किसान की पीट-पीटकर हत्या

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बदायूं: एक मोबाइल… जिसकी कीमत महज़ कुछ हजार रुपये होगी। लेकिन क्या उस मोबाइल की किस्त न चुका पाने की सजा किसी की जान लेकर दी जा सकती है? उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले से एक ऐसा ही झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मोबाइल की फाइनेंस किस्त को लेकर हुए मामूली विवाद ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। किस्त न चुका पाने के गुस्से में एक सिरफिरे ने 50 वर्षीय किसान की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी।

यह दिल दहला देने वाली घटना जरीफनगर थाना क्षेत्र के उस्मानपुर गांव की है। यहां रहने वाले 50 वर्षीय किसान भीमसेन गांव में अपनी बहू मीना के साथ रहते थे, जबकि उनके दोनों बेटे दिल्ली में रहकर रोजी-रोटी कमाते हैं।

क्या था पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, करीब छह महीने पहले भीमसेन ने गांव के ही रहने वाले अजीत के आधार कार्ड और नाम पर फाइनेंस पर एक मोबाइल लिया था। नियम के मुताबिक मोबाइल की किस्त अजीत के खाते से जानी थी, लेकिन पिछले करीब तीन महीने से पैसों की तंगी के चलते किस्त जमा नहीं हो पा रही थी। किस्त न आने के कारण फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी लगातार अजीत के घर के चक्कर काट रहे थे और उस पर दबाव बना रहे थे। इसी बात से गुस्साया अजीत मंगलवार रात करीब 10 बजे सीधे आगबबूला होकर भीमसेन के घर पहुंच गया।

कहासुनी से शुरू हुई बात, ले ली जान

घर पर उस वक्त भीमसेन सुकून से बैठकर खाना खा रहे थे। तभी वहां पहुंचे अजीत ने किस्त को लेकर तक़ाज़ा शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि गुस्से में अंधे हो चुके अजीत ने डंडे से भीमसेन पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। किसान को संभलने का मौका तक नहीं मिला और गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ग्रामीण डॉ. हिर्देश कठेरिया और सीओ सहसवान अशोक कुमार ने भी घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया।

पुलिस ने आरोपी अजीत को हिरासत में ले लिया है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। समाज में आए दिन छोटी-छोटी बातों पर बढ़ती हिंसा और इंसानी जिंदगी की घटती कीमत इस घटना ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पैसों और कागजों से बढ़कर इंसान की कोई कीमत नहीं बची?

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