नई दिल्ली: ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने मंगलवार को एकजुटता दिखाते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष और प्रतिरोध जारी रहेगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि चुनाव प्रणाली, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को आखिरकार न्याय का सामना करना पड़ेगा।
राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय की बैठक में विपक्षी दलों के नेता, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और छात्र संगठनों के सदस्य शामिल हुए। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के सभी हिस्से एक ही मिशन पर एकजुट हैं—भारत में लोकतंत्र की बहाली। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर कोई ‘पैरेलल प्रोटेस्ट’ नहीं है, बल्कि सभी एक साथ लड़ रहे हैं।
‘लोकतंत्र और संविधान पर हमला’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र क्षतिग्रस्त किया गया है, चुनाव प्रणाली कमजोर की गई है और संविधान के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ किसी एक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के मतदान के अधिकार और लोकतांत्रिक भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘वोट चोरी’ की साजिश रचने वाले लोग देश के सामने उजागर हो रहे हैं। राहुल ने कहा, “हमारा वादा है कि जिन लोगों ने यह किया है, उन्हें न्याय का सामना करना होगा। अगर आज नहीं, तो कल या परसों उन्हें सजा मिलेगी।”
खरगे ने कहा—‘वोट चोरी’ उजागर हुई
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘वोट चोरी’ पूरी तरह उजागर हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ मिलीभगत कर रही है और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर कराया जा रहा है।
खरगे ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट है और इसके लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार है। उनके अनुसार, जिन लोगों पर ‘वोट चोरी’ का आरोप है, उनकी जवाबदेही अब बच नहीं सकती।
निर्वाचन आयुक्त की बर्खास्तगी की मांग
विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और ‘वोट चोरी’ से जुड़े अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बहाल करना जरूरी है, क्योंकि लोकतंत्र की नींव मतदान की स्वच्छ प्रक्रिया पर टिकी है।
विपक्ष ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत न देने के फैसले को चुनौती दी जाएगी। राहुल गांधी ने इसे नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के अधिकार पर हमला बताया।
आगे की रणनीति और राजनीतिक संदेश
विपक्षी गठबंधन ने संकेत दिया कि ‘वोट चोरी’, मतदाता सूची संशोधन और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के मुद्दों पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। राहुल गांधी ने कहा कि यह संघर्ष तब तक चलेगा, जब तक लोकतंत्र की बहाली नहीं होती और मतदाता के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
विपक्ष की तैयारी के तहत देशव्यापी जनसंपर्क अभियान और बड़ी रैलियों की योजना पर भी चर्चा चल रही है। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक हथकंडा और झूठे दावों का दौर बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बैठक विपक्ष के लिए संदेश देने वाली सभा थी कि ‘वोट चोरी’ को अब केवल कांग्रेस का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष और सिविल सोसाइटी का साझा मुद्दा बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक राजनीतिक टकराव और गहराने की संभावना है।
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