नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: भारत में मुसलमानों की मस्जिदों और अन्य इबादतगाहों के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाइयों और विध्वंस के विरोध में ‘मॉनिटरिंग कमिटी ऑफ़ इंडियन मुस्लिम्स’ (MCIM) के तहत नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें मुस्लिम संगठनों, सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ताओं, वकीलों और विभिन्न समुदायों के नागरिकों ने हिस्सा लिया। देश के कई स्थानों पर मस्जिदों पर हुए हमलों को लेकर आज सिविल सोसाइटी का यह प्रदर्शन था, जिसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग इबादतगाहों पर हमलों, उन्हें तोड़े जाने, साथ ही व्यापक राष्ट्रीय और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी चिंताएँ ज़ाहिर करने के लिए एक साथ आए थे। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने दर्जनों नेताओं, सांसदों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में भेज दिया, जबकि एक्टिविस्ट और APCR के सीनियर अधिकारी नदीम खान को सुबह से उनके दफ्तर में ही डिटेन करके बिठाए रखा ताकि वे प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।

प्रदर्शन का मक़सद और भागीदारी
आयोजकों के मुताबिक, यह प्रदर्शन सिर्फ़ मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं था; इसमें अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग इबादतगाहों पर हमलों, उन्हें तोड़े जाने, साथ ही व्यापक राष्ट्रीय और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी चिंताएँ ज़ाहिर करने के लिए एक साथ आए थे। प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन समीक्षा (SIR), चुनाव आयोग के दृष्टिकोण, युवाओं और समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों, और धार्मिक स्वतंत्रता व लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान आकर्षित करने की मांग की।
हिरासत में लिए गए प्रमुख नेता
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे निम्नलिखित प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया:
- लोकसभा सांसद इकरा हसन
- सांसद मुहिबुल्लाह नदवी
- सांसद ज़िया-उर-रहमान बर्क़
- जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान
- एस.आई.ओ. के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल हफ़ीज़
- पूर्व सांसद और IMCR के अध्यक्ष मोहम्मद अदीब
- जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी
- दर्जनों छात्र, कार्यकर्ता और नागरिक
हिरासत में लिए गए लोगों को अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया, जिसकी पुष्टि आयोजकों और मीडिया रिपोर्ट्स से हुई है।
नेताओं के बयान: “यह एक मस्जिद से बड़ा मुद्दा है”
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, “हमारा मुद्दा एक मस्जिद या किसी एक समुदाय से कहीं बड़ा है। जब किसी इबादतगाह को गिराया जाता है या कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के बिना उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो इससे कानून के शासन पर गंभीर सवाल उठते हैं।” उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को “बेहद अफ़सोसनाक” करार देते हुए कहा, “नागरिकों को शांतिपूर्वक अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति देने के बजाय समुदाय के रहनुमाओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इस तरह की मनमानी कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक आज़ादी के सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े करती है।”
पूर्व सांसद और IMCR के अध्यक्ष मोहम्मद अदीब ने कहा, “हमने अधिकारियों को कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी थी और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना चाहते थे। नागरिकों को अपनी बात रखने से रोकना और समुदाय के नेताओं को हिरासत में लेना बेहद चिंताजनक है।”
लोकसभा सांसद इकरा हसन ने कहा, “शांतिपूर्ण जन-विरोध को खतरे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। नागरिकों को एकजुट होने और अपनी चिंताएं जाहिर करने का अधिकार है। अधिकारियों को लोगों को बोलने से रोकने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।”
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
आयोजकों ने दोहराया कि प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के बारे में अधिकारियों को पहले ही जानकारी दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि संयुक्त मंच शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक जवाबदेही और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को उठाना जारी रखेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के जवान प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद लोग जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट की ओर बढ़ते रहे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
महबूबा मुफ्ती की अपील और MCIM का आह्वान
इस प्रदर्शन से पहले पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 26 सितंबर को ‘धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले’ लोगों से 29 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि मतदाता सूचियों से मुस्लिमों के नाम हटाए जाने, धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले जैसे मुद्दों पर आवाज़ उठाने के लिए MCIM ने यह प्रदर्शन आयोजित किया है।
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