देवरिया: 65 वर्षीय मोहन प्रसाद की मौत के बाद दफनाने पर मचा विवाद, पुलिस की मौजूदगी में पूरी हुई अंतिम प्रक्रिया

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देवरिया: 65 वर्षीय मोहन प्रसाद की मौत के बाद दफनाने पर मचा विवाद

देवरिया (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में 65 वर्षीय मोहन प्रसाद की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर गांव में विवाद खड़ा हो गया। मोहन प्रसाद के परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का हवाला देते हुए शव को जलाने (दाह संस्कार करने) के बजाय मुस्लिम रीति-रिवाज से दफनाने का फैसला लिया, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया।

क्या है पूरा मामला?

  • इलाज के बाद मौत: मोहन प्रसाद का गोरखपुर में इलाज चल रहा था। इलाज कराने के बाद उन्हें घर लाया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
  • परिजनों का दावा: मोहन प्रसाद की बेटियों और परिवार का कहना था कि उनके पिता और माता लंबे समय से मुस्लिम धर्म की मान्यताओं का पालन कर रहे थे। उन्होंने जीवनकाल में ही यह इच्छा जाहिर की थी कि मृत्यु के बाद उनका दाह संस्कार करने के बजाय उन्हें दफनाया जाए।
  • मुस्लिम मान्यताओं का पालन: परिजनों के अनुसार, मोहन प्रसाद अपने घर में मजार रखते थे, इबादत करते थे और ताजिया भी रखते थे।

गांव में विरोध और पुलिस की एंट्री

जब परिजनों ने शव को दफनाने की तैयारी शुरू की, तो गांव के कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और विरोध शुरू कर दिया। मामला संवेदनशील होते देख स्थानीय कोतवाली पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची।

पुलिस और ग्राम प्रधान अमरेंद्र यादव के सामने परिजनों ने स्पष्ट किया कि वे केवल मृतक की अंतिम इच्छा का सम्मान कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, परिवार के बाकी सदस्य हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं, लेकिन मोहन प्रसाद और उनकी पत्नी मुस्लिम धर्म को मानते थे।

कब्रिस्तान में दफनाया गया शव, पढ़ी गई नमाज

ग्राम प्रधान और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सहमति बनने के बाद, सोमवार को स्थानीय कब्रिस्तान में मोहन प्रसाद के शव को सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया गया। दफनाने की प्रक्रिया के दौरान जनाजे की नमाज भी पढ़ी गई।