हम सबका वतन एक, झंडा और कानून भी एक, कश्मीर की वादियों में तिरंगे की गूंज
श्रीनगर, 17 अगस्त 2025: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कश्मीर की वादियों से एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहल पर पहलगाम में आयोजित विशेष तिरंगा एवं सद्भाव यात्रा ने घाटी को तिरंगे के रंग में रंग दिया। हर हाथ में तिरंगा, हर दिल में देशभक्ति और हर जुबान पर भारत माता की जय का उद्घोष था। यह यात्रा केवल एक जुलूस नहीं बल्कि एक सशक्त घोषणा थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा।
धर्म और वतन की एकता का संदेश
इस यात्रा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंदू और मुसलमान कभी अलग नहीं हैं। दोनों समुदाय वतन, इंसानियत, अपने पूर्वजों की परंपराओं, राष्ट्रध्वज, नागरिकता और कानून के सूत्र से जुड़े हैं। चाहे इतिहास की कोई घटना हो या वर्तमान की चुनौतियाँ, ये दोनों समुदाय हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े हैं और कभी अलग नहीं किए जा सकते। यह यात्रा इस अटूट एकता का प्रतीक बनकर सामने आई, जिसने सभी भारतीयों के लिए भाईचारे और साझा जिम्मेदारी का संदेश दिया। यात्रा ने इस बात को भी गलत साबित करने का काम किया कि हिंदू और मुसलमान कभी साथ नहीं रह सकते। असलियत तो ये है कि हिन्दू और मुसलमान सदियों से साथ थे, साथ है, और हमेशा साथ रहेंगे।

भारत की एकता और अखंडता का सशक्त प्रदर्शन
इस यात्रा का महत्व केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे भारत और विश्व तक एक संदेश बनकर पहुँचा। पहलगाम की सुरम्य वादियों से उठी यह आवाज़ स्पष्ट थी – आतंकवाद और अलगाववाद अब अतीत की बातें हैं, वर्तमान और भविष्य केवल शांति, विकास और भाईचारे के हैं। मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के संयुक्त प्रयास ने यह दिखा दिया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में निहित एकता है। यात्रा के दौरान “हर घर तिरंगा, हर दिल हिंदुस्तान” जैसे नारों ने पूरे वातावरण को देशभक्ति से भर दिया।
सैनिकों को राखी बाँधकर भाईचारे का पैगाम
पहलगाम की यात्रा समाप्त होने के बाद मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता लाथपुरा स्थित 185 CRPF कैंप, जो कमांडो ऑफिस के पास है, पहुँचे। यहाँ उन्होंने देश की रक्षा में लगे सैनिकों की कलाइयों पर रक्षा सूत्र (राखी) बाँधकर यह संदेश दिया कि देश की बेटियां और बहनें सैनिकों की सुरक्षा और कुशलता के लिए हमेशा प्रार्थना करती हैं। महिला कार्यकर्ताओं और बच्चियों ने सैनिकों को तिलक लगाकर राखी बाँधी, और सैनिकों ने भावुक होकर कहा कि यह उनके लिए परिवार के बीच मनाए गए रक्षा बंधन से कम नहीं है। यह दृश्य केवल एक पर्व का उत्सव नहीं था बल्कि यह प्रमाण था कि भारत की जनता और सेना के बीच रिश्ता केवल कर्तव्य का नहीं बल्कि परिवार और भावनाओं का है।
RSS नेता इंद्रेश कुमार का आह्वान – कश्मीर भारत का मुकुट
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार ने यात्रा के अवसर पर कहा कि कश्मीर भारत का मुकुट है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा – “आतंकवाद और अलगाववाद की जड़ें अब कमजोर हो चुकी हैं। आज यह यात्रा स्पष्ट संदेश देती है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) भी भारत का हिस्सा है और एक दिन वह तिरंगे की छत्रछाया में लौटेगा। कोई भी ताकत भारत की अखंडता और संप्रभुता को तोड़ नहीं सकती।” उनका यह बयान घाटी के युवाओं और आम लोगों के लिए प्रेरणा बना, जिसने साबित किया कि कश्मीर अब बदल रहा है और भारत की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक मोहम्मद अफजल का वक्तव्य
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल ने अपने संबोधन में कहा कि इस यात्रा का मकसद कश्मीर की आत्मा और हिंदुस्तान की धड़कन को एक सूत्र में पिरोना है। उन्होंने कहा – “आज मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता और कश्मीर के लोग मिलकर साबित कर रहे हैं कि हिंदुस्तान की आत्मा कश्मीर में उतनी ही गूंजती है जितनी दिल्ली, मुंबई या चेन्नई में। हर घर तिरंगा और हर दिल हिंदुस्तान – यही हमारा लक्ष्य है।” अफजल का यह वक्तव्य स्पष्ट करता है कि मुस्लिम समाज अब न केवल भारत की अखंडता का हिस्सा है बल्कि उसकी रक्षा में भी अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।
अबू बकर नकवी – हिंदू-मुसलमान मिलकर देश की रक्षा कर रहे हैं
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेता अबू बकर नकवी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना है कि हिंदू और मुसलमान दोनों मिलकर भारत की एकता और अखंडता की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा – “यह यात्रा दुनिया भर में उन ताकतों तक संदेश पहुँचाएगी जो भारत को तोड़ने की सोच रखते हैं। हिंदुस्तानी मुसलमान और हिंदू एक साथ खड़े हैं और अखंड भारत के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।” नकवी ने इस यात्रा को उस चेतावनी के रूप में बताया जो उन तमाम शक्तियों के लिए है जो भारत की एकता को चुनौती देना चाहती हैं।
प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्तर – कश्मीर सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्र की आत्मा
प्रोफेसर (डॉ.) शाहिद अख्तर ने कश्मीर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि कश्मीर केवल भौगोलिक सीमा का हिस्सा नहीं बल्कि भारत की आत्मा और सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा – “यह वही भूमि है जहाँ ऋषियों, सूफियों और संतों ने भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया। आतंक कश्मीर की पहचान नहीं है, शांति और प्रेम ही इसकी असली परंपरा है। अखंड भारत का सपना तभी पूरा होगा जब हम इस धरती से फिर से भाईचारे की गूंज को दुनिया तक पहुँचाएंगे।”

डॉ. शालिनी अली – एक मुल्क, एक नागरिकता, एक झंडा
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने अपने संबोधन में इस यात्रा को आंदोलन बताया। उन्होंने कहा – “हमारा वतन एक है, हमारा झंडा एक है और हमारी नागरिकता एक है। हम हिंदुस्तानी थे, हैं और रहेंगे। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी हमारा है और एक दिन अखंड कश्मीर बनकर हिंदुस्तान के तिरंगे में शामिल होगा।” उन्होंने ‘हर घर तिरंगा’ और ‘घर-घर तिरंगा’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत की एकता और गर्व का प्रतीक है।
क़ारी अबरार जमाल – इस्लाम का पैगाम है शांति और भाईचारा
धार्मिक विद्वान कारी अबरार जमाल ने इस अवसर पर कहा – “इस्लाम का असली संदेश शांति और भाईचारा है और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस यात्रा के माध्यम से यही पैगाम पूरी दुनिया को दिया है। सेना को राखी बाँधना केवल एक सांकेतिक कदम नहीं बल्कि यह सच्चाई है कि भारतीय मुसलमान इस मिट्टी को अपनी माँ मानते हैं। जब मुसलमान बहनें सैनिकों को राखी बाँधती हैं तो यह इस बात का प्रतीक है कि हमारी संस्कृति और हमारी आस्था दोनों इस देश की रक्षा के लिए समर्पित हैं।” उनके अनुसार, यह यात्रा उस भ्रम को तोड़ने में सफल रही कि मुसलमान अलग सोचते हैं।
यात्रा में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका
इस यात्रा में रेशमा हुसैन, एस.के. मुद्दीन, इस्लाम अब्बास, मोहम्मद फारूक, मीर नज़ीर, शिराज कुरैशी, डॉक्टर सलीम राज, शाइस्ता खान, ठाकर राजा रईस, हाफिज सबरीन, मोहम्मद इमरान, फैज खान सहित कई कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सबका एक ही स्वर था कि कश्मीर की असली पहचान आतंकवाद नहीं बल्कि शांति, सद्भाव और विकास है। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक सशक्त और व्यापक बनाया।
इतिहास से वर्तमान तक – कश्मीर का बदलता चेहरा
कश्मीर दशकों तक आतंकवाद और अलगाववाद की चपेट में रहा। लेकिन अब बदलते समय के साथ कश्मीर का चेहरा बदल रहा है। आज यहाँ से जो संदेश उठ रहा है, वह यह है कि कश्मीर की असली पहचान हिंसा नहीं बल्कि भाईचारा और इंसानियत है। इस यात्रा ने स्वतंत्रता संग्राम की उस परंपरा को भी दोहराया जब सभी धर्मों और समुदायों ने मिलकर भारत माता की रक्षा की थी।
विश्व शांति का पैगाम
पहलगाम की तिरंगा एवं सद्भाव यात्रा केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भारत की आत्मा का उद्घोष थी। लाथपुरा 185 CRPF कैंप में सैनिकों की कलाइयों पर राखी बाँधने के बाद यह संदेश और भी गूंजदार हो गया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में निहित एकता है। आज कश्मीर की धरती से उठी यह आवाज़ –“हम सबका वतन एक है, हम सबका झंडा एक है” – आने वाले वर्षों में न केवल भारत की अखंडता का आधार बनेगी बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का संदेश भी बनकर गूंजेगी।
- मैनपुरी: स्नातक और शिक्षक एमएलसी चुनाव के लिए पोलिंग पार्टियां रवाना, कल होगा मतदान; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

- फटे ₹10 के नोट पर विवाद, थप्पड़ और अपमान के बाद डिलीवरी पार्टनर समीर हुसैन की मौत; पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार

- ओपी राजभर का बड़ा बयान: ‘पैसा कमाया अखिलेश यादव ने और जेल गए आजम खान’

- सौरव दास-आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं, तिहाड़ से रिहाई के अगले दिन क्राइम ब्रांच ने भेजा समन

- JMI Constitutes Committee to Draft Constitution of Jamia Millia Islamia Students’ Union

- फर्जी शिकायत से मतदाता का नाम कटवाने पर एक साल तक जेल और जुर्माना

- लखनऊ में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का कार्यकर्ता सम्मेलन: संगठन मजबूत करने और सामाजिक सद्भाव के लिए बड़ा अभियान

- डिजिटल मीडिया पर प्रतिबंध: कोगिटो मीडिया फाउंडेशन का सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान, पत्रकारों से विवरण साझा करने की अपील

- फ्रांस में हिंसा के बाद कई शहरों में आंशिक कर्फ्यू, 2,400 से अधिक गिरफ्तार; लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल

- Two Dead, Including 5-Year-Old Girl, and 16 Injured in Tragic Udhampur Bus Accident

- ट्रंप ईरान के खारग द्वीप पर बड़े हमले की तैयारी में? अमीराती मीडिया का बड़ा दावा

- JMI Forms 7-Member Panel to Engage Protesting Students and Restore Campus Calm

