हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग को सलाम करती ‘स्टार्स शाइन’ प्रदर्शनी”

Date:

नई दिल्ली: नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग की चमक एक बार फिर जगमगा उठी है। केंद्र के मीडिया सेंटर की ओर से आयोजित ‘स्टार्स शाइन – एक अनोखी विज्ञापन प्रदर्शनी’ आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में उतर आए सिनेमाई चेहरों की चमक, और विज्ञापन की रचनात्मक ताकत, दोनों को एक साथ महसूस कराती है।

रोजमर्रा की ज़िंदगी में उतरते फिल्मी चेहरे

प्रदर्शनी के कॉन्सेप्ट नोट में बताया गया है कि फिल्मों के अलावा विज्ञापन ही वह माध्यम है, जिसने आम लोगों के जीवन में फिल्मी चेहरों को सबसे गहरी जगह दी है; अखबारों, पत्रिकाओं और होर्डिंग्स पर छपे ये चेहरे फैशन से लेकर जीवन शैली तक, हर स्तर पर जनता की पसंद को दिशा देते रहे हैं। दीवारों पर सजे चुनिंदा विज्ञापन यह दिखाते हैं कि सितारों की लोकप्रियता ने न सिर्फ उत्पाद बेचे, बल्कि भरोसे, आकर्षण और ‘आइकन’ बनने की परंपरा भी गढ़ी।

1950 से 1990 तक के यादगार विज्ञापन

इस प्रदर्शनी में 1950 से 1990 के बीच के करीब 140 दुर्लभ विज्ञापन पोस्टर प्रदर्शित हैं, जिन्हें वरिष्ठ लेखक और संग्रहकर्ता इक़बाल रिज़वी ने वर्षों की मेहनत से संजोया है। यह विज्ञापन उस दौर की सामाजिक आकांक्षाओं, उभरते मध्यवर्ग के सपनों, बदलते फैशन और भाषा की बारीकियों को भी दर्ज करते हैं, इसलिए हर फ्रेम सिर्फ ‘ब्रांड’ नहीं, एक समय-खंड की सांस्कृतिक कहानी की तरह सामने आता है।

सितारों की चमक और विज्ञापन की संवेदना

इन पोस्टरों में सिनेमा के दिग्गज चेहरों को कभी घरेलू उत्पादों के साथ, तो कभी कार, घड़ी, रेडियो, सिगरेट या पेय पदार्थ के विज्ञापनों में मुस्कुराते देखा जा सकता है, जिससे साफ़ दिखता है कि कैसे एक चेहरा पूरे उत्पाद की पहचान बन जाता है। कॉन्सेप्ट नोट में यह भी रेखांकित है कि विज्ञापनों ने सितारों को सिर्फ पर्दे पर चमकने वाली हस्ती नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें हर घर की दीवार, डायरी, कैलेंडर और यादों तक पहुंचा दिया।

उद्घाटन और संदेश

प्रदर्शनी का उद्घाटन फिल्म एवं रंगमंच निर्देशक रमा पांडे ने किया और कहा कि विज्ञापन सिर्फ उत्पाद बेचने की कला नहीं, दिलों तक पहुंचने वाली भाषा है, जो अपने आप में कहानी, कविता और साहित्य की नई विधा का रूप ले चुकी है। क्यूरेटर इक़बाल रिज़वी ने बताया कि ‘स्टार्स शाइन’ आने वाली पीढ़ी को यह समझाने की कोशिश है कि विज्ञापन मात्र व्यापारिक जरूरत नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और सिनेमा के रिश्तों को दर्ज करने वाला जीवंत दस्तावेज भी हैं।

Share post:

Visual Stories

Popular

More like this
Related

Jamia’s RCA Shines: 38 Students Clear UPSC 2025 with 4 in Top 50

NEW DELHI: Jamia Millia Islamia’s (JMI) Residential Coaching Academy...

JIH President Condemns US-Israel Aggression on Iran, Warns Against Wider Gulf War

New Delhi: Jamaat-e-Islami Hind (JIH) President Syed Sadatullah Husaini has...