आतंकी कसाब को फांसी दिलाने वाले उज्जवल निकम बनेंगे राज्यसभा सांसद, पूर्व राजनयिक हर्ष श्रृंगला समेत इन 3 लोगों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया मनोनीत

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मनोनीत किया है, जिनमें पूर्व राजनयिक हर्ष श्रृंगला, उज्ज्वल निकम, इतिहासकार मीनाक्षी जैन और समाजसेवी सदानंदन मास्टर शामिल हैं।

आतंकी कसाब को फांसी दिलाने वाले उज्जवल निकम अब राज्यसभा सांसद बनेंगे। निकम समेत पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, केरल के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सी. सदानंदन मास्टर और प्रख्यात इतिहासकार तथा शिक्षाविद् मीनाक्षी जैन भी राज्यसभा सांसद बनेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। गृह मंत्रालय ने यह अधिसूचना 12 जुलाई को जारी की थी।

इस लिस्ट में विशेष रूप से हर्ष श्रृंगला और उज्ज्वल निकम के नामों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए पहचाने जाते हैं।

कौन हैं उज्ज्वल निकम?

उज्ज्वल निकम का नाम देश के जाने-माने विशेष सरकारी वकीलों में गिना जाता है। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और आतंकवाद से जुड़े मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभाई है। उनका करियर 1991 में कल्याण बम विस्फोट मामले से सुर्खियों में आया, जिसमें उन्होंने मुख्य आरोपी रविंदर सिंह को दोषी ठहराने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के केस में उन्हें राज्य सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया गया, जो उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुआ।

निकम ने टाडा (TADA) अदालत में 14 साल से अधिक समय तक सेवाएं दीं और आतंकवाद से जुड़े मामलों में अभियोजन का नेतृत्व किया। उनका सबसे चर्चित मामला रहा 2008 का 26/11 मुंबई हमला, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब के खिलाफ राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। बाद में निकम ने खुलासा किया कि कसाब द्वारा जेल में मटन बिरयानी की मांग वाली बात उन्होंने जानबूझकर मीडिया के सामने फैलायी थी ताकि जनता के गुस्से को सही दिशा मिल सके। यह बयान लंबे समय तक चर्चा में भी रहा।

कौन हैं हर्ष श्रृंगला?

हर्ष श्रृंगला भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं और अमेरिका में भारत के राजदूत के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें कूटनीति और रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। वह 1984 के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी हैं। अपने 35 साल के लंबे करियर में हर्षवर्धन ने राजधानी नई दिल्ली समेत विदेश में कई अहम पदों पर काम किया है।

वह अमेरिका में भारत के राजदूत (2019) रहे। इससे पहले वह बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त और थाईलैंड में भारत के राजदूत के रूप में भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस (यूनेस्को); अमेरिका (संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क); वियतनाम (हनोई और हो ची मिन्ह सिटी); इजराइल और दक्षिण अफ्रीका (डरबन) में भी काम किया है। हर्षवर्धन ने विदेश मंत्रालय संयुक्त सचिव (महानिदेशक) के रूप में काम किया था, जहां उनके पास बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और मालदीव के लिए जिम्मेदारी थी।

अमेरिका में राजदूत के रूप में काम करने बाद में हर्षवर्धन श्रृंगला 29 जनवरी 2020 में विदेश मंत्रालय के 33वें विदेश सचिव बनाए गए। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की थी और भारतीय विदेश सेवा में आने से पहले भारत में कॉर्पोरेट और पब्लिक सेक्टर में काम किया था।

कौन हैं डॉ. मीनाक्षी जैन?

डॉ. मीनाक्षी जैन मध्यकालीन और औपनिवेशिक भारत की एक प्रख्यात इतिहासकार हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में इतिहास की पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर, नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय की पूर्व फेलो और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद की शासी परिषद की पूर्व सदस्य हैं। वह वर्तमान में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की वरिष्ठ फेलो हैं।

उनके शोध के क्षेत्रों में मध्यकालीन और प्रारंभिक आधुनिक भारत में सांस्कृतिक और धार्मिक विकास शामिल हैं। उनकी गहन शोध वाली पुस्तकें राष्ट्रीय महत्व के ऐतिहासिक मुद्दों से संबंधित हैं। देवताओं की उड़ान और मंदिरों का पुनर्जन्म  (2019),  राम के लिए युद्ध: अयोध्या में मंदिर का मामला  (2017),  सती: इंजीलवादी, बैपटिस्ट मिशनरी और बदलते औपनिवेशिक विमर्श  (2016),  राम और अयोध्या  (2013),  समानांतर रास्ते: हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर निबंध (1707-1857)  (2010). साल 2020 में डॉ. मीनाक्षी जैन को उनके योगदान के लिए भारत सरकार से पद्मश्री पुरस्कार मिला।

कौन हैं सदानंदन मास्टर?

सदानंदन मास्टर शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में दशकों से कार्यरत हैं। उन्होंने विशेषकर वंचित वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के बीच शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया है। उनकी छवि एक जमीनी स्तर पर काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता की है।


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