तेहरान: मध्य-पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक संबोधन में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने उन सभी पड़ोसी देशों से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी है, जो हाल ही में ईरानी मिसाइल या ड्रोन हमलों का शिकार हुए हैं।
कूटनीति पर जोर, हमले की पहल न करने का वादा
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान भविष्य में किसी भी पड़ोसी देश पर हमले की शुरुआत नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “समस्याओं का समाधान कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। ईरान तब तक किसी पड़ोसी पर हमला नहीं करेगा जब तक कि उस पर पहले हमला न किया जाए।”
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति के इस बयान के बावजूद ज़मीनी हकीकत चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के पास अब भी अपने मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य अभियानों पर काफी हद तक स्वायत्त नियंत्रण है।
सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद गहराया संकट
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में स्थिति 28 फरवरी को हुए एक हवाई हमले के बाद बदली, जिसमें ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद से देश का संचालन एक अंतरिम नेतृत्व परिषद द्वारा किया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में जारी इस संघर्ष में अब तक कम से कम 1,230 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
खाड़ी देशों में हड़कंप और हवाई हमले
ईरानी हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में दहशत का माहौल है:
- सऊदी अरब: शैबा तेल क्षेत्र और प्रिंस सुल्तान हवाई अड्डे की ओर आ रहे ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने का दावा।
- बहरीन: पूरे देश में सायरन बजने के बाद आपातकाल जैसी स्थिति।
- दुबई: दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई रक्षा प्रणाली सक्रिय होने के कारण कुछ समय के लिए उड़ानें रोक दी गईं।
अमेरिका और इज़राइल का रुख
एक तरफ जहाँ ईरानी राष्ट्रपति शांति की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमले जारी हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इज़राइल को 151 मिलियन डॉलर के नए हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध का “सबसे बड़ा बमबारी अभियान” अभी शुरू होना बाकी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध और फैला, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का नया दौर शुरू हो जाएगा।
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