आज़म खान ने दिया जयाप्रदा को जवाब कहा, बहुत फ़र्क़ है मेरे रोने और तुम्हारे…

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रामपुर से सऊद खान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं, जिनमें रामपुर(Rampur) नगर विधानसभा सीट पर 21 अक्तूबर को चुनाव होना है।इसके चलते सभी पार्टियों के प्रत्याशी जोर-शोर से अपने प्रचार में जुटे हुए हैं।

रामपुर विधानसभा सीट एक अहम स्थान रखती है क्योंकि इस सीट पर पिछले चार दशक से समाजवादी पार्टी का कब्जा है। जिसके चलते समाजवादी पार्टी इस बार भी अपनी दावेदारी को मजबूत मान रही है और ऐसा भला क्यों ना हो… जब समाजवादी पार्टी के सबसे कद्दावर नेता माने जाने वाले आजम खान(Azam Khan) की पत्नी तंज़ीन फातमा(Tanzin Fatima) इस बार विधानसभा सीट पर दावेदारी करते हुए चुनावी मैदान में है। अपनी पत्नी के लिए आजम खान खुद प्रचार कर रहे हैं।

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रामपुर में 21 अक्तूबर को चुनाव होना है जिसके चलते 19 अक्तूबर की शाम तक प्रचार की प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी। इसके एक दिन पहले सपा के कद्दावर नेता आजम खान ने मंच संभाला और शायराना अंदाज में बिना नाम लिए भाजपा नेत्री व् अभिनेत्री जयाप्रदा पर एक बार फिर निशाना साधा उन्होंने कहा,,,,,

“जिसे ले गई है अभी हवा, वो वर्क था दिल की किताब का”
कहीं आंसुओं से लिखा हुआ, कहीं आंसुओं से मिटा हुआ”

शेर कहने के बाद आजम खान ने कहा यह शेर मेरा अपनी जिंदगी के साथ उन लोगों के लिए है जिनके आंसू जब अदाकारी के लिए बहते हैं तो पैसा मिलता है और जब वफादारी के लिए आंसू बहते हैं तो गम मिलता है। बहुत फर्क है उन आंसुओं में और हमारे आंसुओं में ऐसा मानो जब हम रोते हैं तो मजमा रोता है और जब तुम रोते हो तो मजमा ठहाके लगाता है, हंसता है।

सपा संसद आजम खान(Azam Khan) ने सुप्रीम कोर्ट के बयान उत्तर प्रदेश में जंगलराज है पर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘देश के चलाने वालों मुबारक हो हिंदुस्तान की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है ,कानून का राज नहीं है उत्तर प्रदेश में, जंगलराज है… जंगलराज… एक शब्द सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कहने की किसी की जुर्रत नहीं होनी चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से कहना चाहता हूं अदालत की कुर्सियों पर बैठ हमारे हॉनरेबल जज साहिबान यह देश अगर बचा है तो आपके दिए हुए इंसाफ से बचा है और यह याद दिलाना चाहता हूं यकीनन आप को भी मालूम है कि सुप्रीम कोर्ट जब फैसला कर देती है तो फिर उसकी अपील आसमान पर तो हो सकती है और वह तब हो सकती है जब इंसान इस दुनिया से उठकर आसमान पर चला जाए।

सुप्रीम कोर्ट जो आखरी इंसाफ की अदालत है यह जम्हूरियत की सीढ़ी का आखिरी पायदान है. उसने जंगलराज कहा है… मैं टिप्पणी नहीं कर रहा हूं मैं जानकारी दे रहा हूं कि यहां जंगलराज कैसे हो सकता है जहां मेरे जैसे अपराधी किताबों की चोरी में पकड़े गए हों. यहां जंगलराज कहां है… मुजरिम पकड़ा गया… हजारों की भीड़ में खड़ा है जिसने मुर्गियां चुराई थी, जिसने भैंस चुराई थी. अरे मुकदमे कायम करने वालों अगर बेशर्मी का एक चुल्लू भर पानी हो तो उसमें डूब मरने की कोशिश करो।

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