रामपुर(रिज़वन-ख़ान): उत्तर प्रदेश के सत्ता परिवर्तन के बाद आजम खान पर कई अलग-अलग प्रकरणों में 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से जनपद रामपुर के डूंगरपुर बस्ती से जुड़े 11 मामले भी शामिल हैं।
यहां के कई मुकदमों में पहले ही कोर्ट अपना फैसला दे चुकी है। वहीं इनमें से एक मामले में अब फिर स्थानीय एमपी एमएलए कोर्ट के द्वारा आजम खान को लेकर फैसला सुनाया गया है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान सत्ता में रहने के दौरान काफी चर्चा में रहते थे। अखिलेश यादव की 2012 से 17 तक की सरकार के दौरान लोगों के मकानों पर अतिक्रमण के नाम पर बुलडोजर चलने की काफी चर्चा होती रहती थी।
लेकिन वर्ष 2019 में सूबे की राजनीति की तस्वीर बदल गई। प्रचंड बहुमत से भाजपा विजय हुई और मुख्यमंत्री की कुर्सी योगी आदित्यनाथ ने संभाली। और फिर यहीं से आजम खान पर एक्शन का दौर शुरू हुआ। जिसमें उन पर सरकारी भूमि कब्जाने, लोगों के मकान उजाड़ने, मारपीट, भैंस चोरी, बकरी चोरी, भड़काऊ भाषण, आचार संहिता उल्लंघन आदि जैसे लगभग 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए।
कुछ इसी तरह इनमें गंज थाना क्षेत्र में मौजूद डूंगरपुर बस्ती के 11 मुकदमे भी थे। इन मुकदमों में कई का निस्तारण कोर्ट के द्वारा किया जा चुका है जबकि आज इनमें से एक प्रकरण का फैसला स्थानीय एमपी एमएलए कोर्ट के द्वारा सुनाया गया है।
हालांकि स्वास्थ्य का हवाला देकर आजम खान कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके। वहीं उनको सीतापुर की जेल में रहते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस फैसले को सुनाते समय की कार्रवाई में शामिल किया गया था। आज की सुनवाई के बाद कोर्ट का फैसला अब आजम खान के पक्ष में आया है और इस प्रकरण में सभी अभियुक्तों को बरी किया जा चुका है।
आजम खान पक्ष के सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता एडवोकेट मोहम्मद जुबेर अहमद खान के मुताबिक डूंगरपुर बस्ती के कई मामले रामपुर के स्थानीय एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहे हैं। जहां से धारा 395, 452 506, 447, 448, 411 व 120 बी के तहत कोर्ट से फैसला आया है जिसमें आजम खान सहित सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
गौरतलव है कि सपा शासन काल के दौरान लोगों के मकान तोड़कर यहां पर सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट डूंगरपुर आसरा कॉलोनी बनवा देने को लेकर 11 मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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