बरेली: ख़्वाजा कुतुब स्थित खानकाह-ए-आलिया नियाज़िया में शनिवार को परचम-ए-नियाज़िया की परचमकुशाई के साथ हज़रत कुतुब-ए-आलम मदार-ए-आज़म शाह नियाज़ वे नियाज़ अहमद क़ादरी चिश्ती निज़ामी (20 अ०) का 197वां सालाना उर्स शरीफ शुरू हो गया। यह दस दिवसीय उर्स 22 नवंबर से 2 दिसंबर तक अपनी रूहानी बरकतें बिखेरता रहेगा।
शुरुआत सज्जादानशीन हज़रत मेंहदी मियां नियाज़ी साहब किब्ला ने परचमकुशाई की रसम से की और सभी कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा की।
कदीमी रिवायतों संग परंपरागत शुरुआत
खानकाह-ए-आलिया नियाज़िया के बानी-ए-रूहानी हज़रत शाह नियाज़ (20 अ०), जिन्हें गौस-ए-आज़म और ख़्वाजा गरीब नवाज़ का रूहानी उतराधिकारी माना जाता है, के उर्स की तकरीबात हमेशा की तरह पूरे शानो-शौकत से हो रही हैं।

दिनभर लंगर का सिलसिला जारी रहेगा। सुबह नमाज़-ए-फ़जर के बाद कुरानख्वानी और रात में नमाज़-ए-इशा के बाद महफिल-ए-समा (कव्वाली) आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के नामी कव्वाल सूफ़ियाना कलाम पेश करेंगे। इसके बाद जायरीन चादरपोशी और गुलपोशी करेंगे।
देश-विदेश से उमड़े जायरीन
उर्स में शिरकत के लिए देश-विदेश से जायरीन बरेली पहुंच रहे हैं। भीड़ को देखते हुए खानकाह परिसर में ठहरने, लंगर, सुरक्षा और अन्य जरूरी सहूलियतों के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं।
नोमेले की दरगाह से परचम का जुलूस रवाना
नोमेले की दरगाह से दुआओं और सलाम के साथ परचम-ए-नियाज़िया का जुलूस रवाना हुआ। अंजुमन-ए-साबिरिया चिश्तिया कमेटी की ओर से आयोजित इस जुलूस का नेतृत्व प्रबंधक जुनैदी मियां नियाज़ी ने किया।
जुलूस कोतवाली इस्लामिया होकर खानकाह पहुंचा, जिसमें असकारी मियां नियाज़ी, नासिर मियां, वसीम साबरी, कमाल साबरी, वक़ी अहमद, जाबिर साबरी समेत कई अंजुमनें शामिल रहीं।
खानकाह पहुंचने पर हज़रत मेंहदी मियां नियाज़ी साहब किब्ला ने सहाबज़दगान और मुरिदीन के साथ जुलूस का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया और परचमकुशाई की रसम अदा की।
इंतज़ामात पर प्रबंधक का बयान
प्रबंधक जुनैदी मियां नियाज़ी ने बताया कि इस बार जायरीन की बड़ी तादाद को देखते हुए खानकाह परिसर में ठहरने, लंगर और अन्य इंतज़ाम को और बेहतर बनाया गया है, ताकि हर आने वाला मेहमान अमन, सुकून और रूहानियत के माहौल में उर्स की बरकतें हासिल कर सके।
