कोर्ट के आदेश पर सहसवान थाने में एफआईआर; मृतक और लावारिस खातेदारों की जमीनों के फर्जी बैनामे कराने का आरोप
सहसवान/बदायूं: बदायूं जिले की सहसवान तहसील क्षेत्र में कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीनों के बैनामे कराने का मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बदायूं के आदेश पर सहसवान थाना पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, नायब तहसीलदार और क्षेत्रीय लेखपाल समेत आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बदायूं ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) के तहत वादी ब्रह्मचारी पुत्र लक्ष्मी नारायण, निवासी ग्राम सुजावली, के प्रार्थना पत्र पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन में सहसवान थाने में 22 सितंबर 2026 को मुकदमा संख्या 492/2026 दर्ज किया गया।
पुलिस के अनुसार, मुकदमे में कुंवरपाल पुत्र रूपराम, लालाराम पुत्र रूपराम, नेत्रपाल पुत्र गुलफान निवासीगण ग्राम पावड़ पुख्ता, थाना सहसवान; लालाराम उर्फ लालू पुत्र खुशीराम निवासी ग्राम सुजावली; राजपाल पुत्र रामधुन निवासी ग्राम कुमरौआ, जनपद कासगंज; क्षेत्रीय लेखपाल अच्छेलाल, नायब तहसीलदार अनंगराज और तत्कालीन तहसीलदार हरीश चंद्र को नामजद किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने धोखाधड़ी कर कथित रूप से फर्जी आधार कार्ड तैयार कराए और उनका उपयोग अलग-अलग जमीनों के बैनामे कराने में किया। शिकायत में राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सभी नामजद आरोपियों की भूमिका पुलिस जांच का विषय है।
वादी का कहना है कि उन्होंने साक्ष्यों के साथ पहले वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बदायूं से शिकायत की थी। वहां अपेक्षित कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है।
पावड़ पुख्ता की जमीन का मामला
शिकायत में मौजा पावड़ पुख्ता स्थित गाटा संख्या 966, रकबा 0.020 हेक्टेयर; गाटा संख्या 967, रकबा 0.537 हेक्टेयर; और गाटा संख्या 975, रकबा 0.080 हेक्टेयर भूमि का उल्लेख किया गया है।
वादी के मुताबिक, इन जमीनों के खातेदार राजपाल पुत्र हरनाम गांव छोड़ चुके थे और भूमि लावारिस स्थिति में थी। आरोप है कि कुंवरपाल ने राजपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और स्वयं को राजपाल के रूप में प्रस्तुत कर 28 जुलाई 2022 को अपनी पत्नी रामसनेही के नाम बैनामा करा दिया।
शिकायत में कहा गया है कि उक्त बैनामा मूलवाद संख्या 219/2022 में सिविल जज जूनियर डिवीजन, सहसवान के न्यायालय द्वारा 25 फरवरी 2025 को निरस्त किया जा चुका है। शिकायतकर्ता ने इसी भूमि से जुड़ी अन्य कथित अनियमितताओं की भी जांच की मांग की है।
मृतक खातेदार की जमीन का आरोप
दूसरे मामले में गाटा संख्या 1070, रकबा 0.417 हेक्टेयर और गाटा संख्या 1067, रकबा 0.066 हेक्टेयर भूमि का जिक्र किया गया है। शिकायत के अनुसार, इन जमीनों के खातेदार भूपाल पुत्र डल्ली थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
वादी का आरोप है कि लालाराम उर्फ लालू ने भूपाल के नाम पर कथित फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और किसी अन्य व्यक्ति को भूपाल के रूप में पेश कर जमीन का बैनामा करा दिया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, बैनामा निरस्त कराने के लिए मूलवाद संख्या 250/2025 न्यायालय में दायर किया गया है।
हरदत्तपुर की भूमि भी शामिल
शिकायत में ग्राम हरदत्तपुर स्थित गाटा संख्या 11 की जमीन का भी उल्लेख है। यह भूमि मोहल्ला अकबराबाद मेन रोड पर स्थित बताई गई है और राधेश्याम पुत्र दुर्गाप्रसाद के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है।
आरोप है कि लालाराम उर्फ लालू ने कथित फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर इस जमीन का बैनामा अपनी पुत्रवधू रामा देवी, पत्नी धर्मेंद्र यादव, के नाम करा दिया।
पुलिस विवेचना में रजिस्ट्री के दौरान इस्तेमाल किए गए पहचान पत्र, बैनामे, भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, खातेदारों से जुड़े अभिलेख, नामांतरण प्रक्रिया और राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। शिकायतकर्ता ने कथित फर्जी बैनामों के आधार पर दाखिल-खारिज कराने में संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका और मिलीभगत का आरोप भी लगाया है।
हालांकि, मुकदमा दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं है। पुलिस विवेचना पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों के बैनामे कराने के आरोपों में कितनी सत्यता है और इसमें किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
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