नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी सोमवार को दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में पहुंचे और वहां के निवासियों के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया—कहा कि वे चले जाएंगे, लेकिन जो “सिस्टम” उन्हें ऐसे कदम उठाने पर मजबूर करता है, उससे भी हिसाब होगा।
727 नाम वोटर लिस्ट से कटे: राहुल ने एसडीएम से सीधा सवाल किया
राहुल गांधी ने इलाके के एसडीएम से फोन पर संपर्क कर पूछा कि आखिर 727 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से क्यों काटे गए। उनका साफ़ रुख था कि मकान हो या न हो—यह वोट के अधिकार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। राहुल ने याद दिलाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि “हाउस नंबर 0” बेघरों के लिए है।
एसडीएम की ओर से मिले गोलमोल जवाबों के बाद राहुल ने कहा कि वे इस मुद्दे पर बाद में दूसरे माध्यम से बात करेंगे।
“मकान होने या न होने का वोट से कोई रिश्ता नहीं”navjivanindia
बाद में राहुल गांधी ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने एसडीएम से यही कहा—मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है, फिर भी 727 लोगों के नाम काट दिए गए। उनके मुताबिक, सवाल सिर्फ एक अधिकारी का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है जो ऐसे निर्णयों को जन्म देती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
यह घटना उस लंबे बहस के बीच सामने आई है जिसमें बेघर और झुग्गी निवासियों के पते को लेकर वोटर पहचान और नामांकन प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। राहुल के बयान का मकसद सिर्फ एक अधिकारी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उस सिस्टम को भी जिम्मेदार ठहराना है जो ऐसे कदमों को संभव बनाता है।
