चुनाव आयोग पर कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। पार्टी महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग सॉफ्टवेयर के नाम, संस्करण और उसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है।
कांग्रेस ने इस मामले को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए एसआईआर की प्रक्रिया तत्काल रोकने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई है।
आरटीआई के जवाब को लेकर क्या है विवाद?
जयराम रमेश ने रविवार को एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। उनके मुताबिक, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत निर्वाचन आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए उस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया, जिसमें एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों में गलतियों और गड़बड़ियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर तथा उसके संस्करण की जानकारी मांगी गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने जानकारी को गोपनीयता से जुड़ा बताते हुए आरटीआई कानून के तहत उसे साझा करने से छूट का हवाला दिया। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में आरटीआई आवेदन और आयोग के पूरे जवाब का विवरण शामिल नहीं है।
जयराम रमेश ने ECINET को लेकर क्या कहा?
रमेश ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ECINET सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह सॉफ्टवेयर एसआईआर प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और इसके जरिए मतदाता सूचियों में केंद्रीकृत तरीके से गड़बड़ी की गई है।
उन्होंने कहा, “आयोग ने न तो इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर का नाम बताया है और न ही यह पुष्टि की है कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। साथ ही, यह भी नहीं बताया गया है कि इसके लिए क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं।”
कांग्रेस नेता का कहना है कि सॉफ्टवेयर और एआई के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से मतदाता सूची संशोधन की पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। सॉफ्टवेयर के जरिए गड़बड़ी किए जाने का दावा कांग्रेस का आरोप है; उपलब्ध सामग्री में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
पहले भी सॉफ्टवेयर की भूमिका पर सवाल उठा चुकी है कांग्रेस
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने ECINET की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उपलब्ध 27 सितंबर, 2026 के बयान में भी जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि सॉफ्टवेयर के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) के फैसलों को दरकिनार किया गया। उन्होंने यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि मतदाता सूची के संबंध में अंतिम अधिकार ईआरओ के पास ही रहेगा।
उसी बयान में रमेश ने सॉफ्टवेयर के संचालन और उससे जुड़ी संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की थी। कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूची तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली तकनीक की जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।
आयोग के विस्तृत पक्ष का इंतजार
ताजा विवाद में कांग्रेस की ओर से साझा की गई मीडिया रिपोर्ट और जयराम रमेश के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग की विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे में सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल, एआई की भूमिका और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों से जुड़े आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
- चुनाव आयोग पर कांग्रेस का अब तक का सबसे बड़ा हमला, ECINet सॉफ्टवेयर की जानकारी छिपाने का लगाया आरोप!

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