मुरादाबाद: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के उस बयान पर विवाद गहराता जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर कश्मीरियों को बचा रहा है। इस बयान की निंदा करते हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक और वरिष्ठ पदाधिकारी मोहम्मद मज़ाहिर खान ने कहा कि यह बयान “सरासर गलत” और “देशद्रोही” श्रेणी में आता है। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसे बयान देने वाले नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
फारूक अब्दुल्ला ने क्या कहा?
फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को बारामूला जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कश्मीरियों के प्रति “इरादे ठीक नहीं” हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठा रहा है और यही कारण है कि कश्मीरियों की आवाज दुनिया तक पहुंच रही है।
उन्होंने कहा, “हमारा पड़ोसी हर जगह जाकर कहता है कि कश्मीर का मुद्दा अभी सुलझा नहीं है। वही हमें बचा रहा है, वरना उनके इरादे ठीक नहीं हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण ही केंद्र अभी संयम बरत रहा है।
मज़ाहिर खान की प्रतिक्रिया
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के वरिष्ठ सदस्य मोहम्मद मज़ाहिर खान ने फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जो नेता भारत की संविधानिक जिम्मेदारी निभाते रहे हैं, उनका पाकिस्तान को कश्मीरियों का “रक्षक” बताना गंभीर रूप से चिंताजनक है।
मज़ाहिर खान ने आरोप लगाया कि यह बयान पाकिस्तान-परस्त नजरिये को राजनीतिक वैधता देने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देश की एकता, सुरक्षा और जम्मू-कश्मीर में सामाजिक सद्भाव के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
‘देशद्रोही बयान’, कार्रवाई की मांग
मज़ाहिर खान ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला का बयान “सरासर गलत” है और इसे देशद्रोह की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि ऐसे विवादित और देशविरोधी बयान देने वाले नेताओं पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला या उनके परिवार ने कश्मीरी मुसलमानों के हितों के बजाय राजनीतिक स्वार्थ के लिए जनता को भड़काने का काम किया है। उनका कहना था कि ऐसे बयान कश्मीर के मुद्दे को हल करने के बजाय और उलझाने की कोशिश हैं।
बीजेपी ने भी उठाया सवाल
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ थाकुर ने इसे “राजद्रोहजनक और राष्ट्रविरोधी” बताते हुए पुलिस कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय संविधान की शपथ लेने वाला नेता पाकिस्तान के बयान को राजनीतिक वैधता नहीं दे सकता।
इस बीच, कुछ कश्मीरी पंडित संगठनों ने भी जम्मू में पुलिस शिकायत दर्ज कराकर फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत जांच की मांग की गई है।
राजनीतिक पड़ाव
यह विवाद तब सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा और स्थानीय हितों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। फारूक अब्दुल्ला के बयान को उनकी पार्टी के समर्थक केंद्र से न्याय और अधिकारों की मांग के रूप में देख रहे हैं, जबकि विपक्षी और राष्ट्रवादी संगठन इसे पाकिस्तान के कश्मीर नैरेटिव को बल देने वाला बता रहे हैं।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मज़ाहिर खान का कहना है कि कश्मीर का मसला संविधान, लोकतंत्र और भारत की आंतरिक व्यवस्था के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए—किसी विदेशी देश के हस्तक्षेप या दबाव पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
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