Globaltoday.in | एम निजामुद्दीन | अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय(AMU) के शिक्षकों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने संविधान दिवस के उपलक्ष में संविधान की प्रस्तावना के पाठ में भारत के राष्ट्रपति महामहिम श्री राम नाथ कोविंद के साथ लाइव कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने संविधान जागरूकता संबन्धि भाषणों और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से संविधान में निहित लोकतांत्रिक आदर्शों और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई।
बेगम अज़ीज़ुन निसा हाल में प्रोफेसर सुबुही खान (प्रोवोस्ट) ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता, अवसर की समानता, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए बंधुत्व को बढ़ावा देना जैसे मूल्यों का पालन करने की शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा कि हमारा संविधान असंख्य तरीकों से एक लचीले, विस्तृत और व्यावहारिक दस्तावेज के रूप में जाना जाता है और भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है।
रबाब खान (रेज़ीडेंट वार्डन) ने “भारत का संविधानः एक विशेषाधिकार प्राप्त दस्तावेज़” पर अपने व्याख्यान में राजनीतिक संहिता, संरचना, प्रक्रिया, सरकारी निकायों की शक्तियों और कर्तव्यों के ढांचे को निर्धारित करने वाले संवैधानिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर संविधान निर्माण पर एक वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में हाल के सभी वार्डन और स्टाफ सदस्य शामिल हुए।
मौलाना आजाद पुस्तकालय में प्रोफेसर निशात फातिमा (एएमयू लाइब्रेरियन) ने संविधान के महत्व पर बात की और इस अवसर को चिह्नित करने के लिए प्रस्तावना पढ़ी। उन्होंने बताया कि संविधान की प्रस्तावना के पाठ में सभी पुस्तकालय कर्मचारी भारत के राष्ट्रपति महोदय के साथ शामिल हुए।
अरबी विभाग में प्रोफेसर फैजान अहमद (अध्यक्ष) ने संविधान निमार्ण में डा बी आर अंबेडकर की भूमिका को विस्तार से बताया, जिन्होंने संविधान की मसौदा समिति की अध्यक्षता की। उन्होंने संविधान में निहित सिद्धांतों को बनाए रखने के महत्व पर बात की।
प्रोफेसर समी अख्तर ने सभी नागरिकों को समान अधिकारों की गारंटी देकर अराजकता को रोकने में संविधान की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। प्रोफेसर तसनीम कौसर कुरैशी ने सार्वजनिक जीवन में सभी के लिए लैंगिक समानता और समान व्यवहार पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर गुलाम मुरसलीन (रिटायर्ड शिक्षक, पश्चिम एशियाई अध्ययन विभाग) ने भारतीय संविधान के विभिन्न पहलुओं पर बात की। डा अराफात जफर ने संविधान का मसौदा तैयार करने वाले बुद्धिजीवियों के दृष्टिकोण पर चर्चा की। डा शब्बीर अहमद ने संविधान में सामग्री और खंडों के बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर जोर दिया और डा सैयद अली हुर कामूनपुरी ने प्रस्तावना पढ़ी और प्रतिज्ञा दिलाई।
कामर्स विभाग में इस अवसर पर अध्यक्ष प्रोफेसर नवाब अली खान नेे “संविधान दिवस का महत्व” विषय पर अपने विचार व्यक्त किये जिसमें उन्होंने शिक्षकों, छात्रों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों से संविधान के उद्देश्य को लागू करने का आग्रह किया।
प्रोफेसर मोहम्मद वसीम अली (एएमयू प्राक्टर) ने नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के संरक्षण में न्यायपालिका की सर्वाेच्चता को चित्रित किया। डा सैयद अली नवाज जैदी (एसोसिएट प्रोफेसर, कानून विभाग) ने शांति और सद्भाव बनाए रखने में संविधान की भूमिका पर बात की।
समापन भाषण में डा नगमा अजहर ने कहा कि यह दिन मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है। उन्होंने डॉ असलम खान और डॉ अल्मास सुल्ताना के साथ कार्यक्रम का समन्वयन किया।
प्रोफेसर नसीम अहमद खान (अध्यक्ष, सामाजिक कार्य विभाग) ने संविधान दिवस समारोह में एक सभ्य समाज के सार्वभौमिक सिद्धांत में विश्वास की पुष्टि करने और संवैधानिक मूल्यों का पालन करने के लिए प्रस्तावना पढ़ी और प्रतिज्ञा दिलाई।
इस कार्यक्रम में डा मोहम्मद ताहिर, डा कुर्रतुल ऐन अली, डा मोहम्मद आरिफ खान, डा शायना सैफ, डा अंदलीब, डा मोहम्मद उजैर, डा समीरा खानम, शोध छात्र और विभाग के गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
वीमेंस कालिज द्वारा आयोजित एक वेबिनार में राजनिति शास्त्र विभाग की डा नगमा फारूकी ने मूल्य अधिकारों एवं दायित्वों समेत संविधान के विभिन्न मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किये।
प्रिंसिपल प्रोफेसर नईमा गुलरेज़ ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण एवं कार्यान्वयन के प्रति छात्रों को विशेष रूप से सजग रहने की आवश्यक्ता है।
दृष्टिबाधित छात्रों के अहमदी स्कूल के शिक्षक, छात्र और गैर-शिक्षण कर्मचारी भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावना पाठ की लाइव स्ट्रीमिंग में शामिल हुए।
प्रिंसिपल डा नायला राशिद ने कहा कि “भारत का संविधान” विषय पर एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई जिसमें छात्र सागर (दसवीं कक्षा), हैदर अली (कक्षा 9), एस्सुद्दीन (कक्षा 10) और बासित (कक्षा 9) विजेता रहे जबकि प्रीति (दसवीं कक्षा) और गुलाम मोहिनुद्दीन (कक्षा 9) संयुक्त उपविजेता रहे।
डा नायला ने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए एक झंडा दिवस भी मनाया गया जिसमें भारती यादव (कक्षा 5) और लाईबा (कक्षा 7), और प्रीति (कक्षा 10) ने प्रस्तुतियां दी। छात्रों ने सांप्रदायिक सद्भाव पर कहानियां भी लिखीं।
डा बुशरा अब्बासी, नियाज़ अहमद खान और सिराजुद्दीन शेख ने स्कूल में विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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