सदियों से चली आ रही परंपरा पर ग्रामीण आज भी हैं कायम
उत्तर प्रदेश/संभल(मुजम्मिल दानिश): यूं तो भारत त्यौहारों का देश है इन दिनों जहां एक ओर आजादी के अमृत महोत्सव के तहत मनाए जा रहे राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस की धूम है तो दूसरी ओर भाई बहन के पर्व रक्षाबंधन मनाया गया।
उत्तर प्रदेश में रक्षाबंधन पर बहनों को आने जाने के लिए सीएम आदित्यनाथ योगी ने रोडवेज को 48 घंटे को फ्री भी किया।
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई सूनी
लेकिन आपको जानकार ताज्जुब होगा कि यूपी के जनपद में संभल में एक ऐसा गांव भी है जहां रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता। यहां रक्षाबंधन पर भाई की कलाई सूनी रहेगी, न बहन भाई को राखी बांधेगी और न ही भाई बहन से राखी बंधवाएगा।
जी हां, हम बिल्कुल सही कह रहे हैं। संभल के गांव बेनीपुरचक में अरसे से रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता।
रक्षाबंधन न मनाने के पीछे की दास्ताँ
बेनीपुरचक गांव के लोग इसके पीछे एक लंबी कहानी बताते हैं। अधिकतम यादव जाति की आबादी वाले इस गांव के लोगों के पूर्वज मूलरूप से अलीगढ़ जिले के सिमरई गांव में रहते थे। किंवदंती के अनुसार उस गांव में ठाकुर और यादव जाति के लोग साथ साथ प्रेम से रहते थे। रक्षाबंधन पर यादव जाति की लड़की ने अपने रिश्ते के मुंहबोले भाई(एक ठाकुर लड़के) को राखी बांधी और दक्षिणा में घोड़ा ले लिया। वहीं इस गांव की एक ठाकुर लड़की ने यादव लड़के को राखी बांधी और उपहार स्वरूप पूरा सिमरई गांव मांगा। यादव लड़के ने अपनी जमींदारी का पूरा गांव राखी बांधने वाली मुंह बोली बहन को दे दिया।
चूंकि गांव दक्षिणा में दिया जा चुका था और दी हुई चीज पर अपना कोई हक नहीं बचता। इसलिए सिमरई गांव के यह सभी लोग बेनीपुर चक गांव में आकर बस गए। राखी बांधने के बदले कोई अब संपत्ति न मांग ले इस कारण इस गांव के लोग रक्षाबंधन पर राखी नहीं बंधवाते हैं। यही नहीं इस गांव में दूसरे गांव से शादी होकर आई युवती भी अपने भाई को राखी बांधने अपने मायके नहीं जाती है।
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