NEET (नीट) जैसी देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा का बार-बार लीक होना और फिर रद्द हो जाना, महज़ एक प्रशासनिक विफलता नहीं है; यह देश के लाखों निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों के सपनों की सरेआम हत्या है।
जिन युवाओं ने अपने जीवन के कीमती साल बंद कमरों में खपा दिए, जिन माता-पिता ने उनकी कोचिंग और किताबों के लिए अपनी बुनियादी ज़रूरतों तक का गला घोंट दिया, आज वे पूरे परिवार गहरी मायूसी, अंतहीन चिंता और घोर अन्याय के अंधकार में डूब गए हैं।
डिप्रेशन में छात्र, बेपरवाह सिस्टम
सबसे विचलित करने वाली बात यह है कि जब लाखों छात्र और उनके अभिभावक मानसिक अवसाद और अंधकारमय भविष्य के भंवर में फंसा महसूस कर रहे हैं, तब भी ज़िम्मेदार चेहरों पर न तो कोई शिकन है और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई दिख रही है।
व्यवस्था की यह संवेदनहीनता समाज में एक आत्मघाती संदेश दे रही है—कि इस देश में ईमानदारी और कड़े परिश्रम से ज़्यादा, व्यवस्था की कमियां और रसूखदारों की पहुंच मायने रखती है।
“एक आम परिवार के बच्चे के लिए डॉक्टर बनने का सपना सिर्फ एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि पूरे कुनबे की गरीबी और संघर्ष से मुक्ति का रास्ता होता है।”
सिर्फ पेपर नहीं, भरोसा टूट रहा है
जब ऐसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं तार-तार होती हैं, तो सिर्फ प्रश्नपत्र लीक नहीं होता, बल्कि एक पूरी पीढ़ी का भरोसा टूटता है, उनका मनोबल बिखरता है और देश की शिक्षा व्यवस्था की साख आईसीसीयू (ICU) में चली जाती है। आखिर कब तक देश का होनहार युवा इस पेपर लीक माफिया की कीमत चुकाता रहेगा?

अब बयानों का नहीं, कड़े एक्शन का वक्त है
सरकार और संबंधित संस्थाओं को अब खोखले आश्वासनों और कागज़ी बयानों से बाहर निकलना होगा। जब तक दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होती जो नज़ीर बन सके, तब तक युवाओं का खोया हुआ विश्वास बहाल नहीं हो सकता।
याद रहे, किसी भी राष्ट्र का भविष्य तभी तक सुरक्षित है, जब तक उसके युवाओं को न्याय, समान अवसर और एक बेदाग व्यवस्था की गारंटी मिलती है।
(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि ग्लोबलटुडे इससे सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)
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