कमाल के पत्रकार ‘कमाल’ को विनर्म श्रद्धांजलि- नय्यर हसीन

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पत्रकारिता के क्षेत्र में कमाल खान का नाम किसी परिचय का मुहताज नहीं है. उनका यूँ अचानक दुनिया से चले जाना पत्रकारिता जगत के लिए बड़ी क्षति है.

चाटुकारिता के इस दौर में ईमानदारी से अपने पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए निश्चय ही उन्हें हमेशा याद किया जाएगा.

उनका सौम्य व्यक्तित्व, बेबाक अंदाज, शब्दों को पिरोने की कला शालीनता से अपनी बात को रखने का तरीका उनको अनूठा पत्रकार बनाता है. विषय की गंभीरता उनके हाव भाव से ही प्रतीत होती थी.

नय्यर हसीन
लेखिका- नय्यर हसीन

उनके व्यक्तित्व की एक विशेषता यह भी रही कि वह कभी उत्तेजित नहीं हुए. उनकी भाषा शैली लखनवी तहज़ीब से लबरेज़ होने के साथ अत्यंत ज्ञानवर्धक थी. स्टोरी के अनरूप शायरी, मुहावरों व लोकोक्तियों के प्रयोग के कारण श्रोता उनकी बात अंत तक सुनने के लिए लालायित रहते.

किसी भी घटना की रिपोर्टिंग करते समय उसकी तह तक जाना और उस पर अपने ही अंदाज में बेबाक टिप्पणी करना पत्रकारिता के दाइत्व को तो निभाती ही थी, श्रोताओं को बांधे रखने में भी अहम भूमिका निभाती थी.

उनकी कमी न सिर्फ एनडीटीवी को बल्कि उसके चाहने वालों को यक़ीनन खलेगी.

बड़े शौक़ से सुन रहा था ज़माना
हम ही सो गए दास्ताँ कहते कहते.

लेखिका- नय्यर हसीन
स्वतंत्र पत्रकार
स्वामी विहार हल्द्वानी

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