Opinion

‘सुना है डूब गई है बे-हिसी के दरिया में…’-कलीमुल हफ़ीज़

(मुसलमानों की जहालत और ग़रीबी की सबसे बड़ी वजह दीन का महदूद तसव्वुर है) ये मज़मून एक हादसे कि वजह से लिखना हुआ। हुआ ये...

पश्चिमी सभ्यता का विरोध करने वाले मुस्कान को बे-हिजाब क्यों कर रहे हैं?-कलीमुल हफ़ीज़

हिजाब का मसला ऐसे वक़्त में उठाया गया जब उत्तर प्रदेश के साथ देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं देश में...

उलेमा हों या राना अय्यूब, आमदनी और खर्च का हिसाब पब्लिक करें

ख़लीफ़ा हज़रत उमर के ज़माने में एक बार बैतुल माल मतलब राजकीय कोष से सबको कपड़े बांटे गए। सब ने कुर्ता सिलवाया। हज़रत उमर...

हिजाब पर गरमाती राजनीति!

भारतीय समाज में महिलाओं का सर ढांकना किसी न किसी रूप में प्रचलित रहा है. ओढ़नी महिलाओं के परिधान का महत्वपूर्ण अंग रहा है...

वोटों से कर दो बस मालामाल! शक्ल नहीं दिखाएंगे फिर पांच साल!!

टूटी सड़कें, उफनते नालेगलियां हैं कूड़े से बेहाल! मुंह चिड़ाता खाली सिलेंडरआंख दिखाते तेल,आटा और दाल! आसमान छूती पैट्रोल की कीमतें,बिजली के बिलों ने किया बुरा...

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