Opinion

क़िस्सों में सिमट गयी अवध की होली

होली के खुमार ने भारतीय संस्कृति में कई खूबसूरत अध्याय जोड़े हैं। ये खुमार जब अवध के नवाबों के सिर चढ़ा तो उन्होंने होली...

‘तू हाए गुल पुकार मैं चिल्लाऊँ हाए दिल’ हालिया इलेक्शन के नतीजे जम्हूरियत की रूह के ख़िलाफ़ हैं-कलीमुल हफ़ीज़

डॉक्टर की एक ग़लती इंसान को मौत के मुँह में धखेल देती है, जज की एक ग़लती फाँसी के तख़्ते पर पहुँचा देती है...

‘सुना है डूब गई है बे-हिसी के दरिया में…’-कलीमुल हफ़ीज़

(मुसलमानों की जहालत और ग़रीबी की सबसे बड़ी वजह दीन का महदूद तसव्वुर है) ये मज़मून एक हादसे कि वजह से लिखना हुआ। हुआ ये...

पश्चिमी सभ्यता का विरोध करने वाले मुस्कान को बे-हिजाब क्यों कर रहे हैं?-कलीमुल हफ़ीज़

हिजाब का मसला ऐसे वक़्त में उठाया गया जब उत्तर प्रदेश के साथ देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं देश में...

उलेमा हों या राना अय्यूब, आमदनी और खर्च का हिसाब पब्लिक करें

ख़लीफ़ा हज़रत उमर के ज़माने में एक बार बैतुल माल मतलब राजकीय कोष से सबको कपड़े बांटे गए। सब ने कुर्ता सिलवाया। हज़रत उमर...

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