भारत के निर्माण में उर्दू बुद्धिजीवियों की भागीदारी जरूरी: डॉ. शम्स इकबाल

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राष्ट्रीय उर्दू परिषद के तत्वाधान में तीन दिवसीय विश्व उर्दू सम्मेलन का उद्घाटन

नई दिल्ली: उर्दू सिर्फ एक भाषा नहीं है, यह एक संस्कृति है, एक जीवनशैली है और वैश्विक स्तर की एक समृद्ध भाषा है, जो भारत के निर्माण और भारत को आसमान तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभा सकती है. ये विचार प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और विचारक राम बहादुर राय ने राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के तीन दिवसीय विश्व उर्दू सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि जहां उर्दू को अपने अतीत और वर्तमान पर गर्व होना चाहिए, वहीं समृद्ध भारत के दृष्टिकोण को पूरा करने में अपनी भूमिका निभाने के लिए इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भाषा बनाना भी महत्वपूर्ण है। यह उर्दू सम्मेलन का पहला एजेंडा होना चाहिए। उन्होंने परिषद के निदेशक को इस ऐतिहासिक सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि उनके नेतृत्व में परिषद उर्दू के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ वक्त भारत अभियान में शामिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने कहा कि विकासशील भारत के निर्माण में देशभक्ति की सामान्य भावना भी अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि भारत जिस तरह अतीत में अच्छा था, वैसा ही भविष्य में भी हो सकता है और इसके लिए भारत की अन्य भाषाओं के साथ-साथ उर्दू भी मजबूत भूमिका निभा सकती है.

इससे पहले सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रगान और दीप जलाकर किया गया और परिषद के निदेशक ने सभी अतिथियों का गुलदस्ता, शॉल और मोमेंटो देकर स्वागत किया।

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इस उद्घाटन सत्र में डॉ. शम्स इकबाल ने परिचयात्मक टिप्पणी देते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और सम्मेलन के लक्ष्यों और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना एक राष्ट्रीय सपना है जिसे साकार करने के लिए समाज के हर वर्ग को सामूहिक भूमिका निभानी होगी, इसमें हमारी उर्दू भाषा सहित देश की अन्य भाषाओं की भी असाधारण हिस्सेदारी होगी। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के बाद से देश के निर्माण और विकास में उर्दू भाषा और कलाकारों की अविस्मरणीय भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि आज भी हमें वही भूमिका निभाने की जरूरत है। सम्मेलन के विषयों के बारे में उन्होंने कहा कि प्रस्तुत शोध-पत्र और उन पर हुई चर्चाएं न सिर्फ हमारी भाषा के विकास के नये रास्ते रोशन करेंगी, बल्कि विकसित भारत की परियोजना को पूरा करने का रास्ता भी दिखाएंगी.

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में भाषा विभाग की निदेशक सुश्री सुमन दीक्षित ने कहा कि उर्दू एक बहुत ही खूबसूरत भाषा है जिसके शब्द भारत की सभी भाषाओं में पाए जाते हैं, यही इस भाषा की मुख्य विशेषता है। उन्होंने कहा कि परिषद 1996 से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उर्दू को लोगों तक पहुंचा रही है, यह विश्व सम्मेलन भी उसी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में हमें उर्दू को किताबों से निकालकर हर किसी तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए, उर्दू को न सिर्फ बुजुर्गों की भाषा, बल्कि नई पीढ़ी की भाषा भी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उर्दू का इस्तेमाल होना चाहिए और भारत के निर्माण में उर्दू की भूमिका तय होनी चाहिए.

सम्मेलन के सम्मानित अतिथि प्रोफेसर एहतेशाम हसनैन ने अपने संबोधन में कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य विषय “विकसित भारत” है, जिसमें हमारे देश की सांस्कृतिक घटनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिसमें हमारी उर्दू भाषा भी शामिल है, जिसकी एक विस्तृत शब्दावली है। उन्होंने कहा कि उर्दू एक भारतीय भाषा है, इसकी निन्यानबे प्रतिशत क्रियाएं संस्कृत मूल की हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में उर्दू के प्रति बढ़ती रुचि स्वागत योग्य है।

विशिष्ट अतिथि एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने अपने भाषण में कहा कि इस सम्मेलन के उद्घाटन का दिन बहुत यादगार है, जिसके लिए मैं काउंसिल के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि भारत एक देश नहीं बल्कि एक संस्कृति है और हमारी भाषाएं हमारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं. उन्होंने कहा कि हर भाषा की एक संस्कृति होती है और हर संस्कृति की एक भाषा होती है, दोनों को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

युवराज मलिक ने आगे कहा कि विकसित भारत की अवधारणा एक ऐसी अवधारणा है जो न केवल आर्थिक, बल्कि बौद्धिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषाई विकास का प्रतिनिधित्व करती है। अब हम उर्दू को केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक विषयों तक ही सीमित नहीं रख सकते, बल्कि हमें वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों पर भी आना होगा। उर्दू रचनाओं का अन्य भाषाओं में अनुवाद करने और अन्य भाषाओं के अच्छे साहित्य का बड़े पैमाने पर उर्दू में अनुवाद करने की आवश्यकता है।

तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन सत्र राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से आये उर्दू बुद्धिजीवियों, शिक्षकों एवं उर्दू प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

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