
नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (NCPUL) द्वारा तीन दिवसीय कार्यशाला “बच्चों और युवा पाठकों के लिए उर्दू में सामग्री तैयार करना” का आयोजन नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
कार्यशाला के पहले दिन, प्रसिद्ध कथा लेखक और अनुवादक ज़किया मशहदी, विख्यात चित्रकार और लेखक अबीद सूरती, और प्रसिद्ध बच्चों की लेखिका मरियम करीम अहलावत ने बच्चों की मानसिकता और मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए विषय और भाषा के चयन पर ज़ोर दिया था। कार्यशाला में प्रस्तुत की गई ज्यादा तर कहानियाँ उस कसौटी पर खरी उतरती हुई नज़र आईं।
पिछले तीन दिनों में सबसे अधिक सराहना प्राप्त कहानियों में ज़किया मशहदी की ” एक सच् मुच के राजकुमार की कहानी,” डॉ. शहनाज़ रहमान की “शान-ए-सुल्तानी,” इक़बाल बरकी की “रोबोट,” डॉ. निगार अज़ीम की “दोस्त,” प्रोफ़ेसर शरवतुननिसा की “प्रेम दीवानी :मीरा,” डॉ. मोहम्मद अलीम की “तानसेन: एक अज़ीम मौसीकार,” नईमा जाफ़री पाशा की “हैरतअंगेज कारनामा ,” खुर्शीद अकरम की “शरारती डेनिस,” प्रोफेसर ग़ज़नफ़र की “फूली हुई लोमड़ी,” और मुश्ताक़ अहमद नूरी की “गुफ़्तगू” शामिल हैं, जिन्हें खूब सराहा गया।
कार्यशाला में इंटरएक्टिव सेशन भी आयोजित किए गए, जहां विशेषज्ञों और स्कूल के बच्चों ने प्रस्तुत की गई कहानियों पर अपने विचार साझा किए। मुश्ताक अहमद नूरी की पैगंबर मोहम्मद(स.अ.व) के जीवन पर आधारित कहानी को विशेष रूप से बच्चों ने बहुत पसंद किया, और विशेषज्ञों ने सहमति व्यक्त की कि आज के दौर में इस तरह की कहानियां सुनाने की बहुत जरूरत है।

प्रतिभागियों ने कार्यशाला की विशिष्टता को उजागर किया, क्योंकि इसमें भाग लेने वाले बच्चों से लेकर 90 वर्ष की उम्र तक के लोग शामिल थे। बच्चों द्वारा आत्मविश्वास और जिज्ञासा के साथ कहानियों पर पूछे गए सवाल बहुत ही दिलचस्प और प्रेरणादायक थे। लेखकों को आज के युवाओं की मानसिकता और समझ के स्तर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। वक्ताओं के अनुसार, NCPUL की यह पहल नए लेखकों को प्रशिक्षित करने और बच्चों के लिए उच्च गुणवत्ता की उर्दू सामग्री के उत्पादन को प्रोत्साहित करने में मदद करेगी, जो अन्य भाषाओं में उपलब्ध सामग्री के बराबर होगी।
NCPUL के निदेशक डॉ. मोहम्मद शम्स इक़बाल ने अपनी दृष्टि साझा करते हुए कहा, “उर्दू भाषा में उत्कृष्ट सामग्री है, लेकिन इसकी प्रस्तुति में कमी है। इसलिए, हम चयनित कहानियों को उच्च गुणवत्ता वाली किताबों में रंगीन चित्रों के साथ प्रीमियम पेपर पर प्रकाशित करेंगे ताकि बच्चों को आकर्षित किया जा सके।” उन्होंने आगे कहा, “भारत 2047 तक विकसित भारत का जश्न मनाएगा। हमें इस महान लक्ष्य में अपने स्तर पर योगदान करने के बारे में सोचना होगा, साथ ही उर्दू भाषा को भी प्रोत्साहित करना होगा। नेशनल बुक ट्रस्ट में अपने 25 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं बच्चों की ऐसी किताबें तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ, जो उनके दिमाग की खिड़की को खोलें, एक विकसित समाज के निर्माण के लिए समझ के द्वार खोलें, और विकसित भारत के सपने को पूरा करने में योगदान दें।”
कार्यशाला का समापन डॉ. शमा कौसर यज़दानी (सहायक निदेशक, अकादमिक) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, और इसमें परिषद के सदस्य डॉ. मसरत (शोध अधिकारी), मोहम्मद बहलोल, मोहम्मद अफ़ज़ल हुसैन खान, अफ़रोज़ आलम, और फैजान हक सहित अन्य ने भाग लिया।
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