रामपुर: मुरादाबाद मंडलायुक्त संगीता सिंह, आईएएस की प्रकृति, पर्यावरण और फोटोग्राफी पर केंद्रित पुस्तक ‘Fire in the Semal Tree’ एवं ‘Walking with Wings, Camera’ अब रामपुर रजा पुस्तकालय एवं संग्रहालय के समृद्ध संग्रह का हिस्सा बन गई है। मंडलायुक्त ने पुस्तक की दो प्रतियां रजा लाइब्रेरी को भेंट कीं, जिन्हें एक्सेशन नंबर 68198 और 68199 के अंतर्गत संग्रह में दर्ज कर लिया गया है।
पुस्तकालय के संग्रह में इस कृति का शामिल होना साहित्य, प्रकृति अध्ययन, पर्यावरण जागरूकता और फोटोग्राफी से जुड़े पाठकों एवं शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुस्तक में प्रकृति के विविध रंगों, जीव-जंतुओं की गतिविधियों, पेड़-पौधों और बदलते प्राकृतिक परिवेश को लेखन व छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
प्रकृति और सह-अस्तित्व का संवेदनशील दस्तावेज
‘Fire in the Semal Tree’ शीर्षक प्रकृति के सौंदर्य और उसके जीवंत रंगों का प्रतीक है। पुस्तक में सेमल वृक्ष, उसके परिवेश और प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों के माध्यम से जीवन तथा सह-अस्तित्व के भाव को उकेरने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक की विषयवस्तु में पेड़-पौधों, पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं की गतिविधियों के साथ प्रकृति में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को रेखांकित किया गया है। लेखन के साथ की गई फोटोग्राफी पुस्तक को अधिक प्रभावशाली बनाती है और पाठक को प्राकृतिक दुनिया को नजदीक से देखने की दृष्टि देती है।
यह पुस्तक पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी रेखांकित करती है। तेजी से बदलते शहरी और सामाजिक परिवेश में प्रकृति, जैव-विविधता तथा जीव-जगत के प्रति संवेदनशील होना कितना जरूरी है, यह भाव पुस्तक के माध्यम से सामने आता है। प्रकृति, साहित्य, पर्यावरण और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, युवा पाठकों तथा शोधार्थियों के लिए इसे उपयोगी संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशासन के साथ साहित्य और फोटोग्राफी में रुचि
मंडलायुक्त संगीता सिंह, आईएएस वर्तमान में मुरादाबाद मंडल की मंडलायुक्त हैं। प्रशासनिक दायित्वों के साथ उनकी रुचि साहित्य, प्रकृति, पर्यावरण और फोटोग्राफी में भी है। ‘Fire in the Semal Tree’ उनकी इसी रचनात्मक संवेदना का परिचय कराती है।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में संगीता सिंह की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल साहित्यिक या अकादमिक विषय नहीं रह गया है। जैव-विविधता, स्थानीय प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यावरणीय चेतना में प्रशासन तथा समाज की साझी भूमिका अहम है। उनकी पुस्तक फोटोग्राफी और लेखन के जरिए इसी सरोकार को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती है।
मंडलायुक्त संगीता सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अपनी पुस्तक भेंट की है। पुस्तक के जरिए प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टि विकसित करने का संदेश दिया गया है।
राष्ट्रीय महत्व की धरोहर है रजा लाइब्रेरी
रामपुर रजा पुस्तकालय एवं संग्रहालय देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और शोध संस्थाओं में शामिल है। इसकी स्थापना 1774 में रामपुर रियासत के संस्थापक नवाब फैजुल्लाह खान ने की थी। बाद के नवाबों ने दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुस्तकों, लघु चित्रों और सुलेख कृतियों के माध्यम से इस संग्रह को समृद्ध किया।
भारत सरकार ने वर्ष 1975 में रामपुर राजा लाइब्रेरी अधिनियम के तहत इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा दिया। यह संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन संचालित होती है और भारतीय-इस्लामी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अध्ययन तथा शोध का महत्वपूर्ण केंद्र है।
रजा लाइब्रेरी में अरबी, फारसी, उर्दू, हिंदी, संस्कृत, तुर्की और पश्तो सहित कई भाषाओं की दुर्लभ पांडुलिपियां और पुस्तकें संरक्षित हैं। इसके संग्रह में करीब 17 हजार पांडुलिपियां, जिनमें 150 चित्रित पांडुलिपियां शामिल हैं, के अलावा ताड़पत्र पांडुलिपियां, दुर्लभ मुद्रित पुस्तकें, लघु चित्र, इस्लामी सुलेख और ऐतिहासिक दस्तावेज भी मौजूद हैं।
देश-दुनिया के इतिहासकारों, साहित्यकारों, भाषा विशेषज्ञों, कला शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए राजा लाइब्रेरी एक महत्वपूर्ण ज्ञान-संसाधन केंद्र है। ऐसे प्रतिष्ठित संग्रह में संगीता सिंह की समकालीन प्रकृति आधारित पुस्तक का शामिल होना रामपुर की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत में एक उल्लेखनीय नया अध्याय माना जा रहा है।
दूसरी पुस्तक भी होगी भेंट
मंडलायुक्त संगीता सिंह की एक अन्य पुस्तक भी शीघ्र रामपुर राजा पुस्तकालय एवं संग्रहालय को भेंट किए जाने की संभावना है। यह पुस्तक भी प्रकृति और पक्षी जगत से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें फोटोग्राफी के माध्यम से प्राकृतिक संसार को देखने और समझने की दृष्टि पाठकों के सामने रखी जाएगी।
राजा लाइब्रेरी के संग्रह में दोनों पुस्तकों का शामिल होना साहित्य, प्रकृति, पर्यावरण और फोटोग्राफी से जुड़े ज्ञान-संसाधनों को समृद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।
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