नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र (CWAS) ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का उद्घाटन किया। ‘मेथडोलॉजिकल इनोवेशन, कल्चरल स्टडीज़, एंड एपिसटेमिक जस्टीस इन सोशियल साइन्स रिसर्च’ शीर्षक वाले इस दो सप्ताह के कार्यक्रम का आयोजन नेल्सन मंडेला पीस एवं कनफ्लिक्ट रेजोल्यूशन केंद्र (NMCPCR) के सहयोग से किया जा रहा है।
देशभर से मिले 742 आवेदन
भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम के लिए पूरे देश से 742 आवेदन प्राप्त हुए। पाठ्यक्रम निदेशक प्रो. एच. ए. नाज़मी ने बताया कि सावधानीपूर्वक चयन प्रक्रिया के बाद 30 स्कॉलर्स को चुना गया है। चयनित प्रतिभागी असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के भारत-अरब सांस्कृतिक केंद्र के सम्मेलन कक्ष में आयोजित उद्घाटन समारोह में प्रो. नाज़मी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को विस्तार से रेखांकित किया।
रजिस्ट्रार ने दिया प्रेरक भाषण
मुख्य अतिथि के रूप में जामिया के रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने शुरुआती करियर वाले संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं के लिए ऐसे कार्यक्रमों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध कौशल को मजबूत करने, छात्रों और नीति निर्माताओं की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने और अकादमिक शोध में भारतीय ज्ञान प्रणाली के एकीकरण को सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रो. रिज़वी ने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने शोध को आलोचनात्मक, नैतिक और सांस्कृतिक रूप से निहित दृष्टिकोण से करें ताकि इस क्षेत्र में सार्थक योगदान दिया जा सके।
कुलपति ने रखा समाज के विकास पर जोर
अध्यक्षीय भाषण देते हुए जामिया के कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने संकाय सदस्यों की शैक्षणिक और शोध क्षमताओं को विकसित करने में कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा स्कॉलर्स से ऐसे शोध करने का आग्रह किया जो समग्र रूप से समाज और मानवता के विकास में योगदान दें।
प्रो. आसिफ़ ने शोध में मौलिकता और अखंडता के मूल्यों को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि सामाजिक रूप से प्रासंगिक और परिवर्तनकारी क्षमता वाले शोध की आवश्यकता है।
धन्यवाद ज्ञापन में व्यक्त किया आभार
NMCPCR के मानद निदेशक प्रो. अबुजर खैरी ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कुलपति, रजिस्ट्रार, डीन, केंद्रों के निदेशकों, विभागाध्यक्षों और सभी उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए डॉ. अफशान खान और डॉ. ग़ज़ाला शाबां के प्रयासों की विशेष सराहना की।
यह कार्यक्रम अकादमिक आदान-प्रदान, चर्चा और कठोर पद्धतिगत प्रशिक्षण के माध्यम से देशभर के शुरुआती करियर वाले शिक्षाविदों और स्कॉलर्स के बीच शोध उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
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