बांझपन के इलाज में क्रांति: चीनी वैज्ञानिकों ने बनाई ‘मिनी-वर्म ऑन ए चिप’, गर्भ में बच्चे के स्थिर होने का राज खोला

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A revolution in infertility treatment: Chinese scientists create a 'mini-worm on a chip'
कई महिलाएं मां बनना चाहती हैं लेकिन गर्भवती नहीं हो पातीं। इस चिप की मदद से डॉक्टर उनकी समस्या का पता लगा सकेंगे। — फोटो: फाइल

बीजिंग: बांझपन से जूझ रही महिलाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद जगी है। चीन के वैज्ञानिकों ने दुनिया की पहली ‘मिनी-वर्म ऑन ए चिप’ विकसित की है, जो मां के गर्भाशय की नकल करती है। यह चिप भ्रूण के गर्भाशय से चिपकने की प्रक्रिया को लैब में दोहराती है, जिससे गर्भधारण की असफलताओं का पता लगाना आसान हो जाएगा।

क्या आप जानते हैं कि बच्चा गर्भ में कैसे स्थिर होता है?

शिशु का विकास शुरू होने पर भ्रूण एक छोटे बीज की तरह होता है, जो गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है। वैज्ञानिक इसे ‘इम्प्लांटेशन’ कहते हैं। पहले यह प्रक्रिया शरीर के अंदर होने से अध्ययन मुश्किल था, लेकिन अब यह 3डी चिप वैज्ञानिकों को लैब में ही सब कुछ देखने की सुविधा देती है। चिप पर भ्रूण गर्भाशय की दीवार से चिपकता है और अपनी जगह बना लेता है।

बांझपन उपचार में कैसे मददगार?

लाखों महिलाएं मां बनने का सपना देखती हैं, लेकिन गर्भधारण नहीं कर पातीं। इस चिप से डॉक्टर समस्या की जड़ ढूंढ सकेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने चिप पर अमेरिकी FDA-अनुमोदित 1000 से ज्यादा दवाओं का टेस्ट किया। इससे ऐसी दवाएं मिल सकती हैं जो गर्भधारण में सहायक हों। प्रयोग में असली भ्रूणों के साथ ‘ब्लास्टॉइड्स’ (लैब में बने भ्रूण मॉडल) का भी इस्तेमाल हुआ, जो नैतिक और आसान तरीका है।

हालांकि, चिप अभी पूर्ण रूप से मानव गर्भाशय जैसी नहीं। इसमें रक्त वाहिकाएं और इम्यून कोशिकाएं नहीं हैं, जो भ्रूण को पोषण और सुरक्षा देती हैं। टीम का कहना है, “यह तकनीक गर्भावस्था की सफलता-असफलता समझने में मदद करेगी। इससे नए उपचार विकसित होंगे, जो मां-बच्चे के बंधन को मजबूत बनाएंगे।”