Globaltoday.in | रईस अहमद | रामपुर
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के विकराल रूप धारण करने के पीछे न जाने कितनी लापरवाहीया जिम्मेदार हैं जिन चलते कोरोना की दूसरी लहर सुनामी बन कर कहर ढा रही है।
इन मैं एक बड़ी लापरवाही चुनावी रैलियों और आयोजनों की है जिनमें भीड़ इकट्ठी हुई और कोरोना गाइडलाइंस की खुलकर धज्जियां उड़ाई गई जिन्हें रोक टोंक करने वाला कोई नहीं था। 5 प्रदेशों में हुए चुनाव के ईलावा उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के तीन स्तर पर पंचायत चुनाव भी किए गए ।
अभी तक हुई लापरवाहीयो के रुझान क्या कम दिल दहलाने वाले थे कि एक बार फिर घोर लापरवाही से तूफान मचाने हालात पैदा किये जा रहे है। यह नई लापरवाहिया हो सकती है 2 मई को की जाने वाली मतगणना में आव्यवस्थाएं।
अब इन चुनाव की मतगणना के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ त्रिस्तरीय लड़े गए चुनावों के प्रत्याशियों के मतगणना एजेंट जमा होना है जिसके लिए कड़ी कॉविड गाइडलाइंस जारी कर दी गई है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
हकीकत क्या है इस बात का अंदाजा लगाने के लिए रामपुर के जिला चिकित्सालय के द्वार पर लगाया गया मुख्य चिकित्सा अधिकारी का यह नोटिस काफी है जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा है:-
सेम्पलिंग नहीं होगी, सामग्री उपलब्ध नहीं है! सामग्री आने पर पुनः जांच शुरू कर दी जाएगी – आज्ञानुसार मुख्य चिकित्सा अधिकारी
इस नोटिस में लिखे सामग्री शब्द से आशय टेस्ट किट से है जिसके नहीं होने की सूचना लिखकर जिला चिकित्सालय के द्वार पर लगाई गई है
खास बात यह है कि यह नोटिस मतगणना से दो दिन पहले लगाया गया है जबकि जारी की गई गाइडलाइंस के अनुसार मतगणना स्थल में प्रवेश के लिए नेगेटिव रिपोर्ट होना आवश्यक था। लेकिन अब लगता है कि सरकार ने मतगणना एजेंटों के कोरोना टेस्ट कराए जाने से हाथ खड़े कर लिए हैं।
रामपुर जिला चिकित्सालय के द्वार पर लगाए गए मुख्य चिकित्सा अधिकारी के इस नोटिस की बाबत जब जिलाधिकारी रामपुर
रविन्द्र कुमार माॅदड़ से पूछा गया तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से इसे जिला अस्पताल में उत्तर प्रदेेश में हुए पंचायत चुनाव के मतगणना एजेंटों के पहुंचने से लगने वाली भीड़ को कम करने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा उठाया गया एक कदम बताया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी रामपुर के इस नोटिस का नतीजा यह हुआ कि जिलेभर से कोरोना टेस्टिंग के लिए जिला अस्पताल आए लोग दिनभर भटकते रहे ।
उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है के 5 राज्यों में हुए चुनाव मैं जितने वोटर पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी सब मे मिलाकर है उसने तो अकेले उत्तर प्रदेश के मतदाता हैं ।
ऐसे में यह लापरवाही बेहद बखतरनाक हो सकता है जिसके नतीजे भयावह हो सकते हैं।
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