नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (UDO) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने भारत सरकार से ‘हिंदी दिवस’ की तर्ज़ पर सरकारी स्तर पर ‘उर्दू दिवस’ मनाने की अपील का पुरजोर स्वागत किया है। यह प्रस्ताव साहित्य अकादमी (नई दिल्ली) में उर्दू भाषा के संयोजक, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार चंद्रभान ख़याल द्वारा रखा गया था।
डॉ. ख़ाँ ने कहा कि वर्ष 1997 से 9 नवंबर को मनाए जा रहे ‘विश्व उर्दू दिवस’ का सकारात्मक प्रभाव न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर उर्दू प्रेमियों के बीच देखने को मिला है। ऐसे में यदि प्रबुद्ध वर्ग, चिंतक और भाषा-प्रेमी भारत सरकार से इसे आधिकारिक रूप से मनाने का अनुरोध कर रहे हैं, तो यह मांग पूरी तरह न्यायसंगत और सराहनीय है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करते हुए इसे विधिवत लागू किया जाए।
उर्दू के संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए डॉ. ख़ाँ ने याद दिलाया कि 4 सितंबर 2014 को सर्वोच्च न्यायालय ने ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद’ मामले में उर्दू के पक्ष में ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया था। उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के प्रयासों से आए इस निर्णय के बाद ही देश के 7 राज्यों में उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा बरकरार रखने में सफलता मिली थी। यह फ़ैसला भारतीय संविधान के तहत उर्दू भाषा के अधिकारों की सुरक्षा में एक मील का पत्थर है।
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