रहमतुल्लिल आलमीन, हज़रत मुहम्मद(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आमद सम्पूर्ण सृष्टि के लिए वरदान है. जैसा कि कुरआन में भी कहा गया है कि ईशदूत मुहम्मद स० सारे आलम के लिए रहमत बनाकर भेजे गए हैं. उनकी शिक्षाएं सम्पूर्ण मानवता के लिए कल्याण कारी हैं. मुहम्मद साहब के जन्म के समय अरबी समाज अंधकार में आकंठ डूबा हुआ था. ऐसे में अरब के क़ुरैश खानदान में बीबी आमना के घर एक यशस्वी बालक का जन्म हुआ. बालक का नाम मुहम्मद रखा गया . बाप दुनिया से रुखसत हो चुके थे दादा अब्दुल मुत्तलिब ने बच्चे का पालन पोषण किया. हलीमा नामक दाई को दूध पिलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. होनहार बालक मुहम्मद ने बचपन से ही अपनी प्रतिभा से अपने व आस-पास के क़बीलों में खास पहचान बना ली थी. उनके आचरण से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हें सादिक़, अमीन जैसी उपाधियों से सुशोभित करना शुरू कर दिया.
मुहम्मद साहब के व्यक्तित्व की विशेषता यह थी कि उन्होंने जो भी उपदेश या शिक्षा अपने अनुयायियों को दीं उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करके दिखाया. उस समय अरब में महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय थी. लड़की पैदा होते ही उसे ज़िन्दा दफन कर दिया जाता था. मुहम्मद साहब ने लड़कियों की स्थिति सुधारने हेतु अनेक क़दम उठाए. आपने कहा जो व्यक्ति तीन लड़कियों का पालन पोषण करेगा वह जन्नत में मेरे साथ होगा. और स्वयं चार बेटियों की बेहतरीन परवरिश की. पच्चीस वर्ष की आयु में चालीस वर्ष की विधवा से निकाह करके महिलाओं के उत्थान व संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की. माँ की महत्ता बढ़ाते हुए कहा जन्नत माँ के क़दमों में है. शिक्षा के मामले में महिला पुरुष में कोई भेदभाव नही किया आप स० ने कुरआन के हवाले से कहा इल्म हासिल करना तमाम मुसलमानों के लिए फर्ज़ है चाहे वह मर्द हो या औरत. महिलाओं की आर्थिक स्थिति मज़बूत करने के लिए पिता की संपत्ति में उनका अधिकार सुनिश्चित किया. निकाह के समय पति द्वारा महर दिया जाना अनिवार्य किया.

समाज में समानता स्थापित करने हेतु विशेष कदम उठाए दास प्रथा का विरोध करते हुए जहाँ गुलामों को आज़ाद करने के लिए प्रेरित किया वहीं मुख्य धारा से जोड़ कर सम्मान जनक जीवन प्रदान किया. बिलाल हब्शी रजि ० को अज़ान की ज़िम्मेदारी देकर एक ओर दास प्रथा पर अंकुश लगाने का प्रयास किया वहीं काले गोरे का फर्क़ मिटा कर समानता और समरसता का संदेश दिया. एक अन्य बुराई नशाखोरी जो अरबी समाज में बहुत आम थी. कुरआनी आयात के द्वारा शराब को हराम क़रार देते हुए नशामुक्ति अभियान चलाकर समाज को शराब की लानत से बाहर निकाला. पूंजिवाद समाप्त करने के लिए दान, पुण्य और ज़कात के माध्यम से माल की मुहब्बत को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जिससे एक तरफ पूंजीवाद पर अंकुश लगाने में कामयाबी मिली वहीं गरीबों की स्थिति सुधारने में मदद मिली . मज़दूर की मज़दूरी उसका पसीना सूखने से पहले देने का आदेश देकर मेहनत कशों के अधिकार सुरक्षित कर उनके पक्ष में खड़े नज़र आए. किसी के बीमार पड़ जाने पर उसकी कुशल क्षेम पूछने उसके घर जाना. पड़ोसियों के हक़ूक़ अदा करने की नसीहत करना जैसी अनगिनत कल्याणकारी नीतियों के कारण ही आपको रहमतुल्लिल आलमीन कहा गया.
यदि देखा जाए तो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी चौदह सौ साल पहले थीं. आज भी न केवल उम्मते मुस्लिमा अपितु सम्पूर्ण मानवता ऐसी ही बुराइयों से घिरी हुई है.
अब कोई ईशदूत तो आने वाला नहीं. अत: मुहम्मद स० से मुहब्बत करने वालों की जिम्मेदारी है अपने आचरण से अपनी कथनी और करनी से उनकी शिक्षाओं को दूसरों तक पहुंचाए यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
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