बिहार विधानसभा चुनाव: एनडीए ने दो-तिहाई बहुमत के साथ दर्ज की शानदार जीत, महागठबंधन को करारी शिकस्त

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Bihar Assembly Elections: NDA registers landslide victory with two-thirds majority, Grand Alliance suffers crushing defeat
बिहार विधानसभा चुनाव: एनडीए ने दो-तिहाई बहुमत के साथ दर्ज की शानदार जीत, महागठबंधन को करारी शिकस्त

बिहार विधानसभा चुनाव: एनडीए ने दो-तिहाई बहुमत के साथ दर्ज की शानदार जीत, महागठबंधन को करारी शिकस्त

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे शुक्रवार को आ गए। एनडीए ने प्रदेश में दो-तिहाई बहुमत हासिल करते हुए शानदार जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए ने 200 से अधिक सीटें जीत लीं। वहीं दूसरी ओर महागठबंधन 40 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया।

एनडीए घटकों का प्रदर्शन

बीजेपी 87 सीटों पर विजय और 2 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उसकी सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 79 सीटें जीतीं और 6 सीटों पर आगे रही। एलजेपी (राम विलास) ने 18 सीटें जीतीं और 1 सीट पर बढ़त बनाए रखी। हम (से) ने 5 सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की।

एनडीए खेमे के प्रमुख विजेताओं में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री प्रेम कुमार, महेश्वर हजारी, संजय सरावगी और बीजेपी की मैथिली ठाकुर शामिल रहे।

विपक्षी गठबंधन का खराब प्रदर्शन

‘इंडिया’ गठबंधन का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मात्र 24 सीटें जीतीं और 1 सीट पर बढ़त बनाई। कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं। भाकपा (माले) लिबरेशन ने 2 सीटें और माकपा ने 1 सीट जीती। हालांकि, विपक्षी खेमे से आरजेडी नेता और ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव, दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन के पुत्र ओसामा शहाब और भाकपा (माले) लिबरेशन के संदीप सौरव अपनी-अपनी सीटों से विजयी रहे।

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम ने 5 सीटों पर जीत हासिल की।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने परिणामों को ”काफी अप्रत्याशित” बताया और कहा कि विपक्षी गठबंधन को अधिक एकजुट प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा, ”हमारा आकलन था कि निर्वाचन आयोग के ‘दुरुपयोग’, बिहार में बेरोजगारी और लोकतांत्रिक शासन के अभाव पर व्यापक अभियान के बाद महागठबंधन जीतेगा।” उन्होंने सत्तारूढ़ एनडीए पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग, हेराफेरी और भारी धन के इस्तेमाल का आरोप लगाया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि प्रचार में भारी भीड़ जुटने के बावजूद हार मिली। उन्होंने गठबंधन से गंभीर आत्मचिंतन की अपील की।

भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नतीजों को राज्य की जमीनी हकीकत से मेल न खाने वाला बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि दो दशक से सत्ता में रही सरकार 2010 के अपने प्रदर्शन को कैसे दोहरा रही है।