पोर्ट ब्लेयर (सर विजयपुरम): जमीयत उलेमा-ए-हिंद की राज्यीय और क्षेत्रीय इकाइयों के सदरों (अध्यक्षों) एवं नाज़िम-ए-आला (महासचिवों) का आठवां ‘केंद्रीय मशविरा’ आज से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में शुरू हो गया। अध्यक्ष मौलाना महमूद असअद मदनी के नेतृत्व में आयोजित यह तीन दिवसीय बैठक संगठन की भविष्य की दिशा और सामाजिक सुधारों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है।
ऐतिहासिक धरती से सामाजिक परिवर्तन का संदेश
बैठक का आगाज़ पोर्ट ब्लेयर के होटल ए.आर. प्राइड रेजीडेंसी में हुआ। स्वागत भाषण देते हुए जमीयत उलेमा अंडमान एवं निकोबार के अध्यक्ष मुफ्ती शरफुद्दीन क़ासमी ने अंडमान की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“यह धरती काला पानी की कठिनाइयों और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का जीवंत इतिहास है। ऐसी ऐतिहासिक जगह पर केंद्रीय बैठक का आयोजन संगठन की सेवाओं को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।”
बैठक के मुख्य बिंदु और एजेंडा
महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी ने पिछली कार्यवाहियों का ब्यौरा पेश किया, जिसके बाद विभिन्न राज्यों की प्रगति रिपोर्ट साझा की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में निम्नलिखित विषयों पर विशेष रोडमैप तैयार किया जा रहा है:
- युवा नेतृत्व और प्रशिक्षण: युवाओं के वैचारिक प्रशिक्षण और उन्हें जमीयत के मिशन से जोड़कर नेतृत्व निर्माण पर विशेष ध्यान।
- ‘आदर्श मस्जिद’ प्रोजेक्ट: मौलाना मोहम्मद उमर क़ासमी ने मस्जिद को केवल इबादतगाह तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक सुधार, शिक्षा और नैतिक प्रशिक्षण का केंद्र बनाने का विजन पेश किया।
- संगठनात्मक ढांचा: स्थानीय, ज़िला और प्रांतीय इकाइयों के लिए एक ‘वार्षिक कैलेंडर’ तैयार करना ताकि गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें।
- सामाजिक सरोकार: इमामों की ट्रेनिंग, मैरिज काउंसलिंग (निकाह परामर्श), रफ़ीक प्रोजेक्ट और ख़ैर प्रोजेक्ट जैसे जनहितैषी कार्यों का विस्तार।
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण मशवरे में देश भर से दिग्गज विद्वान और पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- मौलाना मोहम्मद सलमान बिजनौरी (उपाध्यक्ष, जमीयत एवं उस्ताद दारुल उलूम देवबंद)
- मौलाना क़ारी मोहम्मद अमीन (उपाध्यक्ष)
- मुफ्ती शरफुद्दीन क़ासमी (अध्यक्ष, पहली बैठक)
- मौलाना सईद अहमद (अध्यक्ष जमीयत उलेमा मणिपुर, दूसरी बैठक की अध्यक्षता)
यह तीन दिवसीय सम्मेलन आने वाले समय में जमीयत की धार्मिक, शैक्षिक और संवैधानिक सेवाओं के व्यावहारिक खाके को अंतिम रूप देगा। बैठक के समापन पर कई बड़े सांगठनिक निर्णयों की संभावना है।
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