दोहा (कतर): ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मंच से फिलिस्तीन मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे वैश्विक न्याय की कसौटी करार दिया। दोहा में आयोजित एक प्रमुख मंच के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अराकची ने कहा कि फिलिस्तीन का मुद्दा न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि संपूर्ण विश्व की रणनीतिक और नैतिक दिशा निर्धारित करने वाला केंद्र बिंदु है।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर तीखा प्रहार
अपने संबोधन के दौरान अराकची ने वैश्विक संस्थाओं और मानवाधिकारों के दोहरे मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज फिलिस्तीन का मुद्दा इस बात का प्रमाण बनेगा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का वास्तव में कोई अस्तित्व है या नहीं।
अराकची ने वैश्विक समुदाय को आत्ममंथन की चुनौती देते हुए पूछा, “क्या मानवाधिकार वास्तव में सार्वभौमिक मूल्य हैं, या फिर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं केवल शक्तिशाली देशों के हितों को वैध ठहराने का एक माध्यम बनकर रह गई हैं?” उन्होंने जोर देकर कहा कि इन संस्थाओं की असली परीक्षा कमजोर और मजलूमों की रक्षा करने में है।
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‘संघर्ष नहीं, यह सुनियोजित विनाश है’
गाजा की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने इसे ‘युद्ध’ की परिभाषा से बाहर बताया। उन्होंने तर्क दिया कि गाजा में जो घटित हो रहा है, वह दो समान सैन्य शक्तियों के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि एक पूरी नागरिक आबादी का जानबूझकर किया जा रहा विनाश है।
अराकची ने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए गाजा की स्थिति को ‘नरसंहार’ (Genocide) के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि अतीत में फिलिस्तीन विवाद को केवल अवैध कब्जे और अधिकारों के हनन के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब यह संकट मानवीय संवेदनाओं और अंतरराष्ट्रीय नैतिकता की सीमाओं को पार कर चुका है।
रणनीतिक निहितार्थ
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि अराकची का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान इस मंच के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि फिलिस्तीन के समाधान के बिना क्षेत्र में किसी भी प्रकार की स्थायी स्थिरता या सुरक्षा संभव नहीं है।
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