अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट: ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और ठप होती डिप्लोमेसी

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अमेरिका और ईरान के बीच ओमान और इस्तांबुल वार्ता को लेकर गतिरोध बढ़ा। ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बीच क्या टल जाएगी जंग? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही पटरी से उतरती नजर आ रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, वार्ता की शर्तों और स्थान को लेकर दोनों देशों के बीच पैदा हुआ गतिरोध अब सैन्य टकराव की आशंका को बढ़ा रहा है।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

दोनों देशों के बीच शुरूआती सहमति बनी थी कि वार्ता तुर्की के इस्तांबुल में होगी, जिसमें अन्य मध्य पूर्वी देश पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होंगे। लेकिन ऐन वक्त पर ईरान ने नई शर्तें रख दीं:

  • स्थान में बदलाव: ईरान चाहता है कि बातचीत इस्तांबुल के बजाय ओमान में हो।
  • सीमित भागीदारी: ईरान वार्ता को केवल अमेरिका तक सीमित रखना चाहता है, जिसमें अन्य क्षेत्रीय देश शामिल न हों।
  • एजेंडा पर असहमति: ईरान केवल परमाणु मुद्दों पर बात करना चाहता है, जबकि अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों को भी शामिल करने पर अड़ा है।

‘या तो हमारी शर्तों पर बात होगी या नहीं’ – अमेरिका

एक अमेरिकी समाचार वेबसाइट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने उनसे कहा कि या तो यह होगा या कुछ नहीं, और उन्होंने कहा, ‘ठीक है, तो फिर कुछ नहीं।'”

अधिकारी ने कहा कि यदि ईरान मूल रूप से सहमत प्रारूप पर लौटने को तैयार है तो संयुक्त राज्य अमेरिका इस सप्ताह या अगले सप्ताह मिलने के लिए तैयार है।

अधिकारी ने आगे कहा कि “हम जल्द ही एक वास्तविक समझौते पर पहुंचना चाहते हैं अन्यथा लोग अन्य रास्ते तलाशेंगे,” यह राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा बार-बार सैन्य कार्रवाई की धमकी देने के संदर्भ में था।

डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य कार्रवाई का खतरा

इस कूटनीतिक गतिरोध ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए उकसाया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि ईरान जल्द ही समझौते की मेज पर नहीं लौटता, तो अमेरिका “अन्य रास्ते” तलाशने को मजबूर होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीधा संकेत सैन्य कार्रवाई की ओर है।

ईरान का पक्ष: केवल परमाणु मुद्दे पर चर्चा संभव

दूसरी ओर, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा अन्य मुद्दों (जैसे मिसाइल प्रोग्राम) को वार्ता में घसीटना कूटनीतिक रास्तों को बंद कर सकता है। ईरान का रुख साफ है—वह केवल परमाणु विवाद सुलझाने के पक्ष में है।

मध्य पूर्व में बढ़ती हलचल: विटकॉफ और कुशनर का कतर दौरा

तनाव के बीच अमेरिकी कूटनीति सक्रिय है। व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरान मसले पर चर्चा के लिए कतर रवाना हो रहे हैं। वहां वे कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर मध्य पूर्व की स्थिति और ईरान के साथ कूटनीतिक समाधानों पर चर्चा करेंगे।

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