नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जन-महाभियोग’ (Public Impeachment) का प्रस्ताव पेश करते हुए मोदी सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला है। खड़गे ने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर पूरा देश आंदोलित है, लेकिन सरकार जनआक्रोश को दबाने के लिए दमनकारी कदम उठा रही है।
खड़गे ने कहा, “देशभर में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया है। मोदी सरकार ने मेट्रो, रेल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और उल्टा विपक्ष पर ही अराजकता फैलाने का आरोप लगा दिया। यानी नरेंद्र मोदी गलती खुद करें और ठीकरा विपक्ष पर फोड़ें।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार जैसे लोग इस पद पर बने रहे, तो देश में निष्पक्ष चुनाव, लोकतंत्र और संविधान पर खतरा लगातार बढ़ता रहेगा।
‘इंडिया’ जनबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पेश किए गए मुख्य आरोप
31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘जन-महाभियोग’ के दौरान, देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘इंडिया’ जनबंधन के सांसदों और नागरिकों ने संविधान के अनुच्छेद 326 (सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार) का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 6 प्रमुख बिंदुओं पर आरोपपत्र पेश किया:
- चुनावों में हेरफेर और आपराधिक साजिश: मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सत्ताधारी दल को मतदाता सूचियों तक सीधी पहुंच प्रदान की, जिससे मनमाने ढंग से नाम जोड़े और हटाए गए। इसे लोकतांत्रिक नींव पर हमला और संविधान के विरुद्ध कृत्य करार दिया गया।
- 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप: मतदाता सूचियों के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को अपारदर्शी और पक्षपातपूर्ण बताते हुए दावा किया गया कि इसके जरिए जानबूझकर 13.2 करोड़ पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया गया।
- नियमों में गैरकानूनी संशोधन: संसद को सूचित किए बिना ‘Registration of Electors’ Rules, 1960’ के Form 6 में बदलाव करने का आरोप है, जिससे पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं का पंजीकरण प्रभावित हुआ।
- पॉवर का केंद्रीकरण (ERONET/ECINET का दुरुपयोग): स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के अधिकारों को सीमित कर सॉफ्टवेयर के जरिए शक्तियों का केंद्रीकरण चुनाव आयोग में करने का आरोप लगाया गया है, जिससे पारदर्शी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
- सहयोगी चुनाव आयुक्तों की अनदेखी: मुख्य चुनाव आयुक्त पर निर्णय प्रक्रिया से अन्य दो चुनाव आयुक्तों को बाहर रखने का आरोप है। दावा किया गया कि इस कार्यप्रणाली के खिलाफ आधिकारिक रिकॉर्ड पर कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
- संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन और पक्षपात: आरोप लगाया गया कि विपक्ष के नेताओं पर हमलों और अनुचित कार्यवाहियों के दौरान आयोग मूकदर्शक बना रहा। साथ ही, सत्ताधारी दल के प्रति निष्ठा के बदले पारिवारिक लाभ प्राप्त करने के गंभीर आरोप भी लगाए गए।
देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग
प्रस्ताव के अंत में कहा गया कि दिसंबर 2023 में सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को प्रदान की गई कानूनी सुरक्षा को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। ‘इंडिया’ जनबंधन के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि देश और संविधान के साथ किए गए इस कथित विश्वासघात के लिए ज्ञानेश कुमार पर तय कानूनी ढांचे के तहत अदालत में देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए।
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