Globaltoday.in| राहेला अब्बास|सम्भल
आज के इस नफ़रत भरे दौर में जहां देश में हिन्दू और मुसलमानों के बीच दरार डालने की हर मुम्किन कोशिशें कुछ समूहों के लोगों द्वारा की जा रही हैं यहाँ तक कि कोरोना जैसी महामारी को भी ये लोग देश में नफ़रत फैलाने के लिए इस्तमाल करने से नहीं चूके। सोशल मीडिया का इस्तमाल तो आज भी इस नफ़रत को बढ़ावा देने के लिए जमकर किया जा रहा है।
लेकिन ऐसे माहौल में ही देश में अलग अलग सम्प्रदाय के दो नौजवान ऐसे भी हैं जो इसी सोशल मीडिया के ज़रिये इतने क़रीब आ गए कि देश में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बन गए।
कोरोना (Covid-19) काल में हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति से दूर अलग-अलग सम्प्रदाय से जुड़े इन दो दोस्तों की फेसबुक (Facebook) से शुरू हुई दोस्ती आज जनपद सम्भल (Sambhal) में लोगो को आपसी सौहार्द की प्रेरणा दे रही है।
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उत्तर प्रदेश में जनपद सम्भल के हसनपुर गाँव के एक खेत में देसी प्रेक्टिस कर रहा रेसलर विवेक चौबे पिछले छह महीने से रेसलिंग की तैयारी में जुटा हुआ है और वो भी एक मुस्लिम समाज से जुड़े अपने फेसबुक फ्रेंड फैजान के घर और उनके खेत में रोज़ घंटों पसीना बहाता है।
कैसे हुई विवेक और फैज़ान की दोस्ती ?
दरअसल विवेक और फैज़ान की यह दोस्ती कोरोना काल से पहले सोशल मीडिया के पेज फेसबुक से शुरू हुई थी।
उस समय विवेक चौबे बिहार के जनपद गोपालगंज में रह रहा था लेकिन अब वह काफी समय से देश की राजधानी दिल्ली में रह कर आगामी ओलंपिक में भाग लेने के लिए रेसलिंग की तैयारी कर रहा था।
इसी बीच एक दुर्घटना में विवेक का पैर फ्रैक्चर क्या हुआ कि उसका फ़ेसबुक दोस्त फैज़ान विवेक की मदद करने के लिए विवेक से जा मिला।
इसी बीच देश मे कोरोना संक्रमण ने दस्तक दे दी और मूलरूप से बिहार के जनपद गोपालगंज के रहने वाला विवेक चौबे अपने फ़ेसबुक दोस्त फैज़ान के साथ संभल में उसके गांव हसनपुर आ गया और पिछले छह महीने से विवेक यहीं फैज़ान के घर रहकर ओलंपिक की तैयारी के लिए देसी मैदान अर्थात खेत में प्रेक्टिस करते हुए घंटों पसीना बहा रहा है।
विवेक चौबे बताते हैं कि उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर कई मैडल जीते हैं और उनका सपना है कि वो देश को ओलंपिक में मैडल दिला सकें।
आज के माहौल में जहाँ देश में झूठ के ज़रिये हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफ़रत फैलाकर दंगे फ़साद कराने की कोशिशें की जा रही हैं, विवेक चौबे और फैज़ान की दोस्ती ने ऐसे लोगों को कड़ा संदेश दिया है जो हिन्दू-मुस्लिम करके देश-प्रदेश का माहौल खराब करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैं।
सांप्रदायिक ताक़तें देश में हिन्दू और मुस्लिम के बीच दरार डालने की कितनी भी कोशिशें करलें लेकिन जब तक देश में फैज़ान और विवेक जैसे लोग हैं ये साम्प्रदायिक ताक़तें कभी कामयाब नहीं हो सकतीं।
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