वाशिंगटन: डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए अमेरिकी वीजा पाना अब मुश्किल हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने वीजा नीति में बदलाव करते हुए गुरुवार को एक नया निर्देश जारी किया है।
नई वीजा नीति की मुख्य बातें
अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को भेजे गए केबल में निर्देश दिया गया है कि आवेदकों की स्वास्थ्य स्थिति का सख्ती से आकलन किया जाए। हृदय रोग, श्वसन रोग, कैंसर, डायबिटीज, मोटापा, न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को वीजा से वंचित किया जा सकता है।
केएफएफ हेल्थ न्यूज के अनुसार, अमेरिकी सरकार का मानना है कि इन बीमारियों से ग्रस्त लोग समाज पर बोझ बन सकते हैं और अमेरिकी संसाधनों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। केबल में स्पष्ट किया गया है कि इन बीमारियों के इलाज में लाखों डॉलर खर्च हो सकते हैं।
वीजा अधिकारियों की नई जिम्मेदारी
वीजा अधिकारियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदक अपने इलाज का खर्च उठाने में सक्षम है या नहीं। इसके अलावा, आवेदक के परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति की भी जानकारी ली जाएगी।
विशेषज्ञों की चिंता
कैथोलिक लीगल इमिग्रेशन नेटवर्क के वरिष्ठ वकील चार्ल्स व्हीलर ने इस नीति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिशानिर्देश सभी वीजा श्रेणियों पर लागू होते हैं, लेकिन मुख्य रूप से स्थायी निवास के मामलों में इस्तेमाल किए जाएंगे।
व्हीलर ने कहा, “यह चिंताजनक है क्योंकि वीजा अधिकारी चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षित नहीं हैं। उन्हें इस विषय में अनुभव नहीं है और उन्हें व्यक्तिगत ज्ञान के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।”
यह नई नीति पहले से मौजूद स्वास्थ्य जांच प्रक्रिया को और कड़ा बनाती है।
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