ईरानी संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की मंजूरी दे दी है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक माना जाता है।
ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को औपचारिक रूप से बंद करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।
हालाँकि, इस कदम पर अंतिम निर्णय ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा लिया जाएगा, जो ईरान में सैन्य और रक्षा निर्णयों के लिए सबसे अधिक आधिकारिक निकाय है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से क्षेत्र पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकते हैं?
ईरानी संसद ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की मंजूरी दे दी है। इसका क्षेत्र पर क्या असर हो सकता है? यह जानना भी ज़रूरी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान सागर से जोड़ता है। दुनिया भर में हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल इस मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान इस मार्ग के उत्तरी किनारे पर है, जबकि ओमान और संयुक्त अरब अमीरात दक्षिणी किनारे पर हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे, 21 मील चौड़े स्थान पर है। इसे वैश्विक ऊर्जा व्यापार मार्गों में हिमांक बिंदु के रूप में भी जाना जाता है।
ईरानी संसद का यह कदम ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में ईरान-इजराइल युद्ध अपने चरम पर पहुंच चुका है। पूरा क्षेत्र संभावित युद्ध की ओर धकेल दिया गया है। ईरान के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया ईरान ने ऐसा करके अपनी संप्रभुता को चुनौती दी है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस आक्रामकता का कड़ा जवाब देना ज़रूरी था।
तेल की कीमतें बढ़ चुकीं, डिलीवरी सिस्टम पर पड़ेगा बुरा असर
इस असामान्य स्थिति का वैश्विक बाज़ार पर भी गंभीर असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें जनवरी 2025 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कच्चा तेल (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) 74.84 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वैश्विक स्तर पर पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
- अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते के मुख्य बिंदु सामने आए

- Ebola Virus: इबोला के बढ़ते प्रकोप को लेकर भारत ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, इन देशों की यात्रा न करने की सलाह

- ट्रंप ईरान पर हमला करने से पीछे क्यूँ हटे, इजरायली पत्रकार का बड़ा खुलासा

- फोर्ब्स मिडिल ईस्ट 2026 सूची: एम. ए. यूसुफ अली बने सबसे अमीर मलयाली; नौ भारतीयों ने बनाई जगह

- मिडिल ईस्ट संकट: ईयू ने प्रभावित सेक्टरों के लिए ‘अस्थायी सहायता फ्रेमवर्क’ लागू किया

